विश्व पर्यावरण दिवस 2026: राजस्थान विश्वविद्यालय में "पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जलवायु कार्यवाही" पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Jun, 2026 05:49 PM

world environment day 2026 rajasthan university national conference

जयपुर: विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के पर्यावरण विज्ञान विभाग के तत्वावधान में "पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जलवायु कार्यवाही के माध्यम से सतत भविष्य" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन...

जयपुर: विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के पर्यावरण विज्ञान विभाग के तत्वावधान में "पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जलवायु कार्यवाही के माध्यम से सतत भविष्य" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए लगभग 200 शिक्षक, वैज्ञानिक, शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हुए।

 

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. बी.एल. शर्मा, पूर्व कुलपति राजस्थान विश्वविद्यालय रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. मधुर मोहन रंगा, डीन विज्ञान संकाय, सरगुजा विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ ने की। प्रो. शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दुरुपयोग को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. रंगा ने कहा कि सतत विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण और पुनर्स्थापन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं और शोधकर्ताओं से पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

 

राष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज सम्पूर्ण मानवता के सामने गंभीर चुनौती है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, हीट वेव और जैव विविधता के क्षरण के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और सतत जीवनशैली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

 

सम्मेलन में प्रस्तुत शोध-पत्रों में जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरणीय नीतियां और राजस्थान की पर्यावरणीय चुनौतियों पर सार्थक चर्चा हुई।

 

समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. जगबीर सिंह किर्ती, पूर्व विभागाध्यक्ष, पंजाबी विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक अनुसंधान, जन-जागरूकता और नीति-निर्माण के समन्वय को पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक बताया। निदेशक डॉ. चौहान ने सम्मेलन के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान, अनुभव और शोध परिणामों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं।

 

सम्मेलन का समापन पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, और इस अवसर पर विश्व पर्यावरण दिवस का नया लोगो भी विमोचित किया गया।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!