Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Jul, 2026 11:32 AM

जयपुर: राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने एकलपीठ के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें शून्य कटऑफ वाली विभिन्न श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द करने के निर्देश...
जयपुर: राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने एकलपीठ के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें शून्य कटऑफ वाली विभिन्न श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द करने के निर्देश दिए गए थे। इस आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है और अब शून्य अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के चयन की संभावना भी बरकरार है।
मामले की सुनवाई जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और राज्य सरकार की ओर से दायर अपील पर की। सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद एकलपीठ ने 22 मई के आदेश में नई शर्त लागू कर दी, जबकि भर्ती नियमों और विज्ञापन में न्यूनतम अंक निर्धारित करने का कोई प्रावधान नहीं था। ऐसे में बाद में नई पात्रता शर्त जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि एकलपीठ के आदेश से बड़ी संख्या में ऐसे चयनित अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें मामले में पक्षकार भी नहीं बनाया गया था। इन दलीलों पर विचार करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले एकलपीठ ने शून्य कटऑफ वाली श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द करते हुए कहा था कि किसी भी सरकारी भर्ती में न्यूनतम अंक निर्धारित होना आवश्यक है। अदालत का मानना था कि न्यूनतम योग्यता स्तर तय किए बिना चयन प्रक्रिया संवैधानिक मानकों पर खरी नहीं उतरती। एकलपीठ ने कर्मचारी चयन बोर्ड को भविष्य में न्यूनतम अंक तय करने की छूट भी दी थी और यह टिप्पणी की थी कि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भी सरकारी सेवा के लिए न्यूनतम योग्यता का स्तर होना चाहिए।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया था कि भर्ती विज्ञापन और नियमों में न्यूनतम अंक का कोई उल्लेख नहीं था। ऐसे में जिन श्रेणियों में कटऑफ शून्य रही है, वहां शून्य अंक या शून्य से कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के बीच व्यावहारिक रूप से कोई अंतर नहीं है। इसलिए उन्हें भी नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि शून्य अंक प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी मिलेगी। फिलहाल अदालत ने केवल एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है, जिससे पूर्व की चयन प्रक्रिया फिलहाल प्रभावी बनी हुई है। मामले का अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई और सभी पक्षों के जवाब के बाद ही होगा। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया और पात्रता को लेकर अंतिम स्थिति आगामी न्यायिक आदेश पर निर्भर करेगी।