बदल गए राजस्थान Panchayat Electon Rules, अब ऐसे लोग भी लड़ सकेंगे चुनाव

Edited By Anil Jangid, Updated: 22 Jul, 2026 02:38 PM

rajasthan panchayat election rules changed

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों से जुड़ा एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। करीब 30 वर्षों से लागू दो-संतान संबंधी पात्रता नियम को समाप्त कर दिया गया है। अब दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति भी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव में उम्मीदवार के रूप...

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों से जुड़ा एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। करीब 30 वर्षों से लागू दो-संतान संबंधी पात्रता नियम को समाप्त कर दिया गया है। अब दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति भी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव में उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने संशोधित कानून के अनुरूप सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

 

आयोग ने स्पष्ट किया है कि मार्च 2026 में जारी अधिसूचना के अनुसार संशोधित कानून प्रभावी हो चुका है। इसके साथ ही उम्मीदवारों से दो से अधिक संतान नहीं होने संबंधी शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) लेने का 27 वर्ष पुराना आदेश भी निरस्त कर दिया गया है। यानी अब नामांकन के दौरान दो-संतान की शर्त लागू नहीं होगी।

 

राजस्थान में यह नियम करीब तीन दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था। नियम के तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों को पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और नगर निकाय पार्षद जैसे स्थानीय जनप्रतिनिधि पदों के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था।

 

इस नियम का ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव देखने को मिला था। कई ऐसे स्थानीय और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि, जिनके दो से अधिक बच्चे थे, चुनाव लड़ने से वंचित हो गए थे। लंबे समय से इस नियम में बदलाव की मांग भी उठती रही। अब भजनलाल सरकार द्वारा कानून में संशोधन किए जाने के बाद ऐसे सभी लोगों के लिए चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता साफ हो गया है।

 

राज्य सरकार ने केवल दो-संतान संबंधी प्रतिबंध ही नहीं हटाया है, बल्कि नगरपालिका अधिनियम में संशोधन करते हुए कुष्ठ रोग को लाइलाज मानकर चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने वाले प्रावधान को भी समाप्त कर दिया है। सरकार का मानना है कि चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति को देखते हुए पुराने प्रावधानों में बदलाव आवश्यक था।

 

इधर, लंबे समय से लंबित पंचायत और निकाय चुनावों की प्रक्रिया भी अब गति पकड़ती दिखाई दे रही है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार पंचायत और नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया 15 अगस्त से शुरू होगी और 15 नवंबर तक पूरी किए जाने की संभावना है। पहले नगर निकाय चुनाव कराए जाएंगे, जबकि 23 सितंबर को पंचायत चुनाव की अधिसूचना और कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

 

इस बदलाव के बाद राज्य की स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। बड़ी संख्या में ऐसे संभावित उम्मीदवार, जो अब तक दो-संतान नियम के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते थे, अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। हालांकि, इस निर्णय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।

 

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों से पहले लागू हुआ यह संशोधन स्थानीय स्वशासन की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें आगामी चुनावी प्रक्रिया और नए नियमों के प्रभाव पर टिकी हैं।

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