Rajasthan Panchayat Election पर एक सप्ताह में फैसला! OBC रिपोर्ट पर बोले मंत्री झाबर सिंह खर्रा

Edited By Anil Jangid, Updated: 12 Jul, 2026 02:50 PM

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जयपुर। राजस्थान में पिछले काफी समय से लंबित चल रहे पंचायती राज व स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जयपुर। राजस्थान में पिछले काफी समय से लंबित चल रहे पंचायती राज व स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन चुनावों में हो रही देरी और अन्य प्रशासनिक मुद्दों को लेकर राजस्थान सरकार में मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने एक बड़ा बयान जारी किया है। मंत्री खर्रा ने कहा है कि पिछड़ा वर्ग को स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में उचित राजनीतिक आरक्षण देने के संबंध में राज्य सरकार पूरी तरह से गंभीर है। परंतु इस प्रक्रिया में आ रही कानूनी और तकनीकी बाधाओं के चलते निर्वाचन आयोग अभी तक चुनावी कार्यक्रम जारी करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ सका है।

 

मंत्री खर्रा ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों और कानूनी बाध्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग की तरफ से सटीक और सत्यापित डेटा मिलने में हो रही देरी के कारण ही इस पूरे मामले का स्थायी निदान अभी तक नहीं निकाला जा सका है। मंत्री खर्रा मतदाताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार इस मामले को और अधिक लटकाना नहीं चाहती। और उन्होंने उम्मीद जताई है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पूरी गंभीरता दिखाते हुए जितनी जल्दी हो सकेगा, ओबीसी आबादी के सभी सटीक और सत्यापित आंकड़े राज्य सरकार को सौंप देगा। उन्होंने बताया कि जैसे ही यह डेटा सचिवालय को प्राप्त होगा, उसके तुरंत बाद सरकार पूरी मुस्तैदी से काम करते हुए मात्र 1 सप्ताह के भीतर उस पर अपना अंतिम नीतिगत निर्णय ले लेगी और बिना किसी देरी के संशोधित और स्वीकृत सीटों की पूरी सूची राज्य निर्वाचन आयोग को फॉरवर्ड कर दी जाएगी, ताकि चुनाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो सके।

 

मंत्री खर्रा ने पूरी प्रोसेस विस्तार से समझाते हुए बताया कि पिछड़ा वर्ग को स्थानीय चुनावों में राजनीतिक आरक्षण का लाभ देने के संबंध में देश की सर्वोच्च अदालत का एक स्पष्ट और कड़ा निर्णय मौजूद है। इस निर्णय के जरिए किसी भी राज्य सरकार को सीधे तौर पर आरक्षण लागू करने की अनुमति नहीं है। इसके लिए एक विशेष ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होता है। इस इस नियम के तहत सबसे पहले स्थानीय प्रशासन को अपने-अपने स्तर पर फील्ड में जाकर एक प्रारंभिक सर्वे पूरा करना होता है, जिसके माध्यम से पिछड़ा वर्ग की आबादी और उनके प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति का खाका तैयार किया जाता है। ऐसे में अब मंत्री खर्रा के बयान से साफ हो चुका है कि सरकार पंचायती राज व निकाय चुनावों को लेकर गंभीर है और ये जल्द हो सकते हैं।

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