Edited By Anil Jangid, Updated: 17 Jul, 2026 02:45 PM

जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनावों में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट संकेत दिया है कि...
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनावों में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि निर्वाचन आयोग समय पर चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो न्यायालय स्वयं जज नियुक्त कर चुनाव कराने पर विचार कर सकता है।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति क्या हो सकती है कि अदालत को यह कहना पड़े कि "आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताएं, जज करवा देंगे।" गहलोत ने इसे सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया।
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की मंशा पंचायत और निकाय चुनाव समय पर कराने की नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग का यह बयान बेहद गंभीर है कि पंचायती राज विभाग को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिला आरक्षण से संबंधित जानकारी के लिए छह बार पत्र लिखने के बावजूद आवश्यक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। गहलोत के अनुसार यह दर्शाता है कि सरकार के दबाव में विभाग ने जानकारी रोकी और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि न्यायालय के आदेशों की लगातार अनदेखी संविधान और न्यायपालिका का अपमान है। उनका कहना था कि जो सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान नहीं करती और चुनाव कराने में देरी करती है, उसके नैतिक और संवैधानिक दायित्वों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति बताया।
उधर, राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को आगामी 20 जुलाई 2026 तक पंचायत और निकाय चुनावों का विस्तृत रोडमैप पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और आरक्षण की लॉटरी की प्रक्रिया पूरी करने को भी कहा है। इसके साथ ही संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को सभी आवश्यक दस्तावेजों और जानकारी के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।
पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार पर सवाल उठा रहा है। अब हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक महत्व का बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से अदालत में पेश किए जाने वाले रोडमैप और चुनावी कार्यक्रम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। वहीं, इस पूरे मामले में राज्य सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है।