सख्त हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियम, अब नहीं चलेगा सुसाइड और एडल्ट कंटेंट

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Jul, 2026 02:47 PM

social media platforms tighten rules crack down on suicide content

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने पिछले कुछ वर्षों में कंटेंट मॉडरेशन को पहले की तुलना में काफी सख्त बना दिया है। खासकर आत्महत्या (सुसाइड), सेल्फ-हार्म और अश्लील (एडल्ट) कंटेंट के खिलाफ अब तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

जयपुर। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने पिछले कुछ वर्षों में कंटेंट मॉडरेशन को पहले की तुलना में काफी सख्त बना दिया है। खासकर आत्महत्या (सुसाइड), सेल्फ-हार्म और अश्लील (एडल्ट) कंटेंट के खिलाफ अब तेजी से कार्रवाई की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन संवेदनशील श्रेणियों में हटाए गए कंटेंट की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजर सुरक्षा को लेकर बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाती है।

 

आंकड़ों के मुताबिक, आत्महत्या और सेल्फ-हार्म से जुड़े कंटेंट पर की गई कार्रवाई की हिस्सेदारी वर्ष 2022 में 5.41 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 21.44 प्रतिशत हो गई। इसी प्रकार अश्लीलता से जुड़े कंटेंट पर कार्रवाई का प्रतिशत 10.97 से बढ़कर 16.85 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह बदलाव बताता है कि सोशल मीडिया कंपनियां अब संवेदनशील और संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट के प्रति अधिक सतर्क हो गई हैं।

 

दूसरी ओर, बुलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में कार्रवाई की हिस्सेदारी 2022 के 2.32 प्रतिशत से घटकर 2025 में 1.85 प्रतिशत रह गई। इसी तरह हेट स्पीच से संबंधित मामलों का प्रतिशत भी 1 प्रतिशत से घटकर 0.59 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि, इन आंकड़ों का यह अर्थ आवश्यक रूप से यह नहीं है कि ऐसी घटनाएं कम हुई हैं; यह कार्रवाई के वितरण और रिपोर्टिंग पैटर्न में बदलाव को भी दर्शा सकता है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि कंटेंट मॉडरेशन में यह बदलाव मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सिस्टम, मशीन लर्निंग तकनीक, यूजर सुरक्षा पर बढ़ते फोकस और विभिन्न देशों में लागू हो रहे डिजिटल नियमों के कारण संभव हुआ है। अब सोशल मीडिया कंपनियां आत्महत्या, सेल्फ-हार्म, बच्चों की सुरक्षा, अश्लीलता, हिंसा और हेट स्पीच से जुड़े कंटेंट की पहचान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से कर पा रही हैं।

 

कई मामलों में संदिग्ध पोस्ट को यूजर की शिकायत मिलने से पहले ही स्वचालित सिस्टम के जरिए चिन्हित कर हटा दिया जाता है। भारत जैसे बड़े सोशल मीडिया बाजार में बढ़ती डिजिटल भागीदारी को देखते हुए कंपनियां अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस को अधिक सख्ती से लागू कर रही हैं। ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स और यूजर्स के लिए यह जरूरी है कि वे प्लेटफॉर्म के नियमों का पालन करें और ऐसा कोई कंटेंट साझा न करें जो कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करता हो। इससे न केवल पोस्ट हटाई जा सकती है, बल्कि अकाउंट पर भी कार्रवाई की संभावना रहती है।

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