H3N2 Virus हो रहा जानलेवा ,जाने एक्सपर्ट्स की जुबानी। Rajasthan Health Update ||

Edited By Afjal Khan, Updated: 15 Mar, 2023 06:26 PM

h3n2 virus is becoming fatal know the words of experts

देश में आई कोरोना जैसी महामारी से देश ने नहीं बल्कि बाहरी देशों ने भी बहुत परेशानी का सामना किया सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन की स्थिति थी. हर वर्ग के लोगों को खान-पान से लेकर बीमारी का सामना करना पड़ा था। वही राजस्थान में फिर से 'कोरोना' जैसा वायरस, फिर...

देश में आई कोरोना जैसी महामारी से देश ने नहीं बल्कि बाहरी देशों ने भी बहुत परेशानी का सामना किया सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन की स्थिति थी. हर वर्ग के लोगों को खान-पान से लेकर बीमारी का सामना करना पड़ा था। वही राजस्थान में फिर से 'कोरोना' जैसा वायरस, फिर से हावी हो रहा है और इसके बच्चे ज्यादा शिकार हो रहे है और इस वायरल में 12-15 दिन तक खांसी रहती और यह फेफड़ों तक फैल रहा। इसके साथ ही राजस्थान ही नहीं देशभर में H3N2 नाम के वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। इस वायरस की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे हैं, उन्हें ठीक होने में 10 से 12 दिन तक लग रहे हैं। 7% बच्चों को तो कंडीशन बिगड़ने पर ICU तक में भर्ती करना पड़ रहा है।
वायरस फ्लू श्रेणी का है, लेकिन इसका असर कोरोना की तरह देखा जा रहा है। यानी बुखार के साथ फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है।

आखिर H3N2 वायरस क्या है?
H3N2 वायरस एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस है, जिसे इन्फ्लूएंजा ए वायरस कहा जाता है। यह एक सांस रिलेटेड वायरल इन्फेक्शन है जो हर साल बीमारियों का कारण बनता है। इन्फ्लूएंजा ए वायरस का सबटाइप है जिसकी खोज 1968 में हुई थी।


बुखार कितने दिनों में उतर जाता है?
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) का मानना है कि इन्फेक्शन के लक्षण पांच से सात दिनों तक बने रहे सकते हैं। H3N2 से होने वाला बुखार तीन दिनों में उतर जाता है। लेकिन खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा दिनों तक बनी रहती है।

ये होते हैं लक्षण

मरीज में 3-5 दिन तक तेज बुखार आने के साथ ही नाक बहना।
तेज खांसी के साथ गले में दर्द या जलन जैसी शिकायत।
खांसने के बाद सांस लेने में तकलीफ होना।
शरीर में कमजोरी के साथ थकान।
बचाव के लिए ये करें उपाय।

मास्क पहनना जरूरी, नहीं तो चपेट में आ सकते हैं कई लोग
ये बीमारी ड्रॉपलेट्स से भी फैलती है। जिस तरह कोविड से बचने के लिए लोग मास्क पहनते है, उसी तरह मास्क पहने तो बहुत अच्छा है। मास्क नहीं पहनने पर आप अपने हाथों को समय-समय पर साफ रखे यानी साबुन अथवा सेनेटाइजर इस्तेमाल करें। जिन व्यक्ति के खांसी, छींक आ रही है, उनसे दूर रहे या उनसे खांसते वक्त रूमाल का उपयोग करने के लिए कहे। कोमोरबिडिटी यानी दूसरी बीमारी (ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, अस्थमा, हार्ट पेशेंट, किडनी फेलियर समेत अन्य) से ग्रसित मरीजों को इंफेक्शन से बचने के लिए ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।

H3N2 वायरस से बचने के लिए बरतें ये सावधानी

खुद को हाइड्रेट रखें, लिक्विड पीते रहें।
बुखार, खांसी या सिरदर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
इन्फ्लूएंजा वायरस से बचने के लिए फ्लू शॉट्स लें।
बुखार, सर्दी-खांसी होने पर अपने मन से एंटीबायोटिक्स न लें।
घर के बाहर मास्क लगाकर रखें, भीड़ वाली जगह से बचें।
.....तो बिना देर किए अस्पताल में मरीज को भर्ती कराएं
सांस लेने में तकलीफ होना
ऑक्सीजन लेवल 93 से कम हो
छाती और पेट में दर्द और दबाब महसूस होना
बहुत ज्यादा उल्टी आना
ठीक होने के बाद भी तेज बुखार और खांसी रिपीट होने लगे।

H3N2 वायरस संक्रमित 7% रोगी पहुंच रहे ICU
राजस्थान में इसका कोई पुख्ता आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। हालांकि इस वायरस से अभी तक एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। लेकिन आईसीएमआर के मुताबिक, देशभर में पिछले महीनों में H3N2 वायरस की चपेट में आए और अस्पताल में भर्ती मरीजों में 92% मरीजों में बुखार, 86% को खांसी, 27% को सांस फूलना, 16% को घरघराहट की समस्या थी। संस्था ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि 16% रोगियों को निमोनिया था और 6% को दौरे पड़ते थे। वायरस के कारण होने वाले सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से पीड़ित लगभग 10% रोगियों को ऑक्सीजन और 7% को ICU देखभाल की जरूरत होती है।

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