लेखक जगदीप सिंह और वरिष्ठ पत्रकार स्वाति वशिष्ठ के बीच संवाद, JLF में 'व्हेन गॉड्स डोंट मैटर' पुस्तक का विमोचन

Edited By Anil Jangid, Updated: 16 Jan, 2026 06:20 PM

dialogue between jagdeep singh and swdialogue between jagdeepati vashisht at jlf

जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में एएएफ बागान वेन्यू पर 'व्हेन गॉड्स डोंट मैटर' शीर्षक से एक रोचक लिटरेरी सत्र का आयोजन हुआ। इस सेशन में कवि और पीआर प्रोफेशनल, जगदीप सिंह ने सीनियर जर्नलिस्ट और लेखक, स्वाति वशिष्ठ के साथ संवाद किया। इस अवसर...

जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में एएएफ बागान वेन्यू पर 'व्हेन गॉड्स डोंट मैटर' शीर्षक से एक रोचक लिटरेरी सत्र का आयोजन हुआ। इस सेशन में कवि और पीआर प्रोफेशनल, जगदीप सिंह ने सीनियर जर्नलिस्ट और लेखक, स्वाति वशिष्ठ के साथ संवाद किया। इस अवसर पर जगदीप सिंह द्वारा लिखित उनके नए पोएट्री कलेक्शन, 'व्हेन गॉड्स डोंट मैटर' का आधिकारिक विमोचन भी किया गया। पुस्तक का विमोचन लेखक और कल्चरिस्ट संदीप भूतोड़िया ने फेस्टिवल को-डायरेक्टर नमिता गोखले और टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर, संजॉय के. रॉय के साथ मिलकर किया।

 

चर्चा के दौरान, जगदीप सिंह ने अपनी कविता के फिलॉसॉफिकल और इमोशनल पहलुओं के बारे में बात की, जिसमें विश्वास, पहचान और तेज़ी से बदलती दुनिया में मानवीय हालत जैसे विषय शामिल रहे। उन्होंने बताया कि ‘व्हेन गॉड्स डोंट मैटर’ उनके अनुभवों और आत्मचिंतन से उपजी कविताएं है, जहां कविता उनके लिए मौन, आस्था और व्यक्तिगत सच से संवाद करने का माध्यम बन जाती है।

 

स्वाति वशिष्ठ ने चर्चा समकालीन समय में कविता की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज की कविता किस तरह ईश्वर से हटकर व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक सच्चाइयों पर केंद्रित हो रही है। संवाद में यह भी सामने आया कि जगदीप सिंह की रचनाएं उन पाठकों से जुड़ती हैं जो अनिश्चितता, मूल्यों के अभाव और पारंपरिक ढांचों से हटकर किसी अर्थ की तलाश में हैं। 

 
इस मौके पर जगदीप सिंह ने कहा कि उनके लिए कविता जवाब देने के बारे में नहीं, बल्कि सच्चे सवाल पूछने के बारे में है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘व्हेन गॉड्स डोंट मैटर’ उन पलों को बताने की एक कोशिश है जब इंसान विश्वास से ज़्यादा मानवीय संवेदनशीलता और अंतरात्मा ज़रूरी हो जाते हैं।

 
सत्र को और अधिक भावपूर्ण बनाते हुए, जगदीप सिंह ने अपनी तीन से चार कविताओं का पाठ भी किया, जिससे श्रोताओं को उनकी रचनाओं की भावनात्मक गहराई से जुड़ने का अवसर मिला।

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