Edited By Sourabh Dubey, Updated: 13 Jan, 2026 07:41 PM

देश और दुनिया में लगातार बदलते वैश्विक हालात, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच इस बार जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में साहित्य के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर भी गहन मंथन होने जा रहा है।
जयपुर। देश और दुनिया में लगातार बदलते वैश्विक हालात, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच इस बार जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में साहित्य के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर भी गहन मंथन होने जा रहा है।
जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वैश्विक कॉन्फ्लिक्ट्स को लेकर सवाल पूछने पर जवाब देते हुए जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल के संयोजक संजॉय के. रॉय ने बताया कि इस बार फेस्टिवल में इंटरनेशनल कॉन्फ्लिक्ट्स पर करीब 12 सेशंस की एक विशेष सीरीज़ आयोजित की जाएगी।
संजॉय के. रॉय के अनुसार, यह सीरीज़ भारत के इमीडिएट नेबरहुड से शुरू होकर वैश्विक स्तर तक फैले संघर्षों को कवर करेगी। इसमें बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हालात के साथ-साथ इज़राइल–फिलिस्तीन, अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका में चल रहे फॉरगॉटन वॉर्स पर भी चर्चा होगी।
उन्होंने बताया कि इस सीरीज़ की की-नोट शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के नए रेजिडेंट कमिश्नर के साथ की जाएगी। इस सेशन में यह समझने की कोशिश की जाएगी कि मौजूदा दौर में मल्टीलेट्रल ऑर्गेनाइजेशन्स और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की क्या भूमिका रह गई है और भविष्य में उनकी प्रासंगिकता किस रूप में होगी।
संजॉय के. रॉय ने यह भी कहा कि आज की दुनिया में कोई नई वैश्विक व्यवस्था या संगठन सामने नहीं आया है, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और अन्य मल्टीलेट्रल संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी संदर्भ में जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल एक ऐसा मंच बनेगा, जहां साहित्य, विचार और वैश्विक राजनीति का संगम देखने को मिलेगा।
इस तरह जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल 2026 न सिर्फ लेखकों और पाठकों का उत्सव होगा, बल्कि दुनिया के सबसे संवेदनशील और जटिल मुद्दों पर संवाद का भी एक अहम केंद्र बनेगा।