अशोक गहलोत का सीएम भजनलाल को पत्र — जयपुर डंपर हादसे के पीड़ितों को मुआवजे में देरी पर जताई चिंता

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 06 Nov, 2025 08:07 PM

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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के हरमाड़ा में तेज रफ्तार डंपर से कुचलकर हताहत हुए सभी पीड़ित परिवारों के परिजनों को मुआवजा वितरण में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है तथा मांग की है

जयपुर । राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के हरमाड़ा में तेज रफ्तार डंपर से कुचलकर हताहत हुए सभी पीड़ित परिवारों के परिजनों को मुआवजा वितरण में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है तथा मांग की है कि जैसलमेर बस हादसे एवं मतोड़ा हादसे की तर्ज पर ही मुआवजा जल्द से जल्द जारी किया जाए एवं अन्य राज्यों के मृतकों को भी इसमें शामिल किया जाए।

अशोक गहलोत ने इस बाबत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने प्रदेश में हाल में हुई दर्दनाक दुर्घटनाओं का उल्लेख किया। अशोक गहलोत ने लिखा कि प्रदेश में भीषण सड़क दुर्घटनाओं जैसे जयपुर डंपर हादसा (13 मौत), भांकरोटा हादसा (20 मौत), मनोहरपुर-दौसा सड़क हादसा (11 मौत), मतोड़ा सड़क हादसा (15 मौत) एवं अन्य दुर्घटनाओं जैसे जैसलमेर बस अग्निकांड (28 मौत), SMS अस्पताल अग्निकांड (8 मौत) आदि की एक दुर्भाग्यपूर्ण श्रृंखला चल रही है, जो बेहद चिंताजनक और हृदय विदारक है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा न मिलने के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा  कि " 5 नवंबर को SMS अस्पताल में मिलने पर मुझे पीड़ितों के परिजनों ने अवगत करवाया है कि राज्य सरकार द्वारा अभी तक उनके लिए कोई मुआवजा नहीं दिया है। सरकारी अधिकारियों ने इस बाबत् बताया कि PMNRF की सहायता राशि एवं पात्र परिवारों को आयुष्मान (चिरंजीवी) दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिलेगा।" 

मुआवजा देने में सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए गहलोत ने लिखा है कि पीड़ित कोई एक परिवार या समुदाय के लोग नहीं थे इसलिए इनके लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए कोई धरना-प्रदर्शन भी नहीं कर रहा है। इसका यह आशय बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि इन पीड़ितों के परिजनों को सहायता न दी जाए।

मुआवजा मिलने में होने वाली देरी पर सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्न उठाते हुए लिखा है कि ऐसा देखा गया है कि इन हादसों के बाद पीड़ित परिवारों को संबल देने हेतु दी जाने वाले सरकारी मुआवजे की राशि देरी से घोषित होती है। कई बार तो परिजनों के धरने-प्रदर्शन एवं सामाजिक तथा राजनीतिक दबाव के बाद सहायता दी गई जो कि कहीं न कहीं संवेदनशीलता में कमी दिखाता है।

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