कोटा, जयपुर और अजमेर में बस हड़ताल का मिला-जुला असर, यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Feb, 2026 01:56 PM

mixed impact of bus operators strike in kota jaipur and ajmer

कोटा: कोटा सहित प्रदेश के कई हिस्सों में बस ऑपरेटरों की हड़ताल का मंगलवार को मिला-जुला असर देखने को मिला। हड़ताल में हाड़ौती संभाग के निजी बस संचालक भी शामिल हैं। कई निजी बसें बंद रहीं, जबकि कुछ रूटों पर सीमित संख्या में बसों का संचालन जारी रहा।...

कोटा: कोटा सहित प्रदेश के कई हिस्सों में बस ऑपरेटरों की हड़ताल का मंगलवार को मिला-जुला असर देखने को मिला। हड़ताल में हाड़ौती संभाग के निजी बस संचालक भी शामिल हैं। कई निजी बसें बंद रहीं, जबकि कुछ रूटों पर सीमित संख्या में बसों का संचालन जारी रहा। अधिकांश बसें स्टैंड पर खड़ी नजर आईं, जिनमें स्टेट कैरिज, स्लीपर कोच और नाइट सर्विस बसें शामिल हैं।

 

जयपुर और अजमेर में भी प्राइवेट बसों की हड़ताल का असर दिखाई दिया। यात्रियों को घंटों बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ा। कई लोगों ने बताया कि उन्हें नौकरी ज्वाइन करने या जरूरी पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए यात्रा करनी थी, लेकिन हड़ताल की पूर्व सूचना नहीं होने से परेशानी बढ़ गई। शादी-विवाह के सीजन के चलते यात्रियों की संख्या भी अधिक है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।

 

बस ऑपरेटर अशोक चांदना के अनुसार, हाड़ौती संभाग की करीब 500 से अधिक बसें इस हड़ताल में शामिल हैं। इंटरसिटी स्लीपर कोच बसों के एसी और वोल्वो श्रेणी के रिजर्वेशन पूरे राजस्थान में बंद कर दिए गए हैं। पहले से हुई बुकिंग का किराया रिफंड किया जा रहा है। कोटा से उदयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, पाली, सिरोही, जैसलमेर, जयपुर और जालौर सहित अन्य शहरों के लिए सेवाएं प्रभावित हुई हैं। राज्य के बाहर अहमदाबाद, दिल्ली, इंदौर, भोपाल और लखनऊ जैसे शहरों के लिए भी बस सेवाओं पर असर पड़ा है।

 

बस संचालकों का कहना है कि बिना स्पष्ट नियमों के चालान काटे जा रहे हैं और वाहनों की फिटनेस में दिक्कत आ रही है। साथ ही न्यू बॉडी कोड लागू होने से पुरानी बसों के संचालन पर रोक लग रही है। उनकी मांग है कि पहले से परमिट और टैक्स जमा कर चुकी बसों को निर्धारित समय तक चलाने की अनुमति दी जाए।

 

इधर, रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ सामान्य दिनों से अधिक रही, लेकिन अतिरिक्त बसें नहीं बढ़ाई गईं। अधिकारियों के अनुसार, यात्रीभार में बहुत अधिक वृद्धि नहीं हुई है, फिर भी निजी बसों के सीमित संचालन के कारण यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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