Edited By Raunak Pareek, Updated: 11 Jan, 2026 08:38 PM

जयपुर के पीताम्बरा लोक स्थित माँ बगलामुखी धाम में 1100 किलो मिर्ची बगलामुखी महायज्ञ का भव्य आयोजन हुआ। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ, महाआरती और प्रसादी में भाग लिया। यह महायज्ञ नकारात्मक ऊर्जा नाश, शत्रु बाधा निवारण और मानसिक शांति के...
पीताम्बरा लोक स्थित माँ बगलामुखी धाम, कादेडा–चाकसू (जयपुर) में रविवार, 11 जनवरी 2026 को आयोजित 1100 किलो मिर्ची बगलामुखी महायज्ञ भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। यह महायज्ञ माता बगलामुखी शक्तिपीठ समिति, जयपुर के तत्वावधान में और पीठाधीश्वर श्री आशुतोष बगलामुखी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। इस आयोजन में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने भी अपनी भक्ति और आस्था का परिचय देते हुए इस दिव्य यज्ञ में भाग लिया। कार्यक्रम स्थल पर मंत्रों और हवन की घुमंतियों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
महायज्ञ प्रातः 11:00 बजे शुरू हुआ और दोपहर 3:00 बजे तक चला। इस दौरान माता को 56 भोग अर्पित किए गए, जबकि प्रसादी वितरण 3:00 से 5:00 बजे तक सम्पन्न हुआ। संध्या में 6:00 बजे महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीपमालाओं और मंत्रों के माध्यम से माता की आराधना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मिर्ची बगलामुखी महायज्ञ नकारात्मक शक्तियों का नाश, शत्रु बाधा निवारण, वाणी सिद्धि, विजय और मानसिक शांति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। आयोजकों के अनुसार, इस महायज्ञ में सम्मिलित होकर भक्त अपने जीवन की बाधाओं, संकटों और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पा सकते हैं।
इस अवसर पर पीठाधीश्वर आशुतोष बगलामुखी के सान्निध्य में अनेक आध्यात्मिक और सामाजिक संकल्प पूर्ण किए गए। इसमें देवी बगलामुखी सेना, पृथ्वी बचाओ मिशन, एक रोटी मानवता के नाम, और बगलामुखी बीज मंत्र लेखन अभियान शामिल रहे। ये पहलें न केवल भक्तों की भक्ति को प्रगाढ़ करती हैं, बल्कि समाज में जागरूकता, सेवा और संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रेरक साबित होती हैं। भक्तों ने विशेष रूप से विश्वशांति और राजस्थान की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर नकारात्मकता का अंत करेंगे और समाज में भाईचारे एवं सेवा की भावना को बढ़ावा देंगे।
आयोजन स्थल पर भक्तों के चेहरे पर आस्था, उल्लास और उत्साह की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। आयोजकों ने जयपुर और आसपास के क्षेत्रों के सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अधिकाधिक संख्या में पधारकर इस महायज्ञ में शामिल हों और पुण्य लाभ अर्जित करें। पीताम्बरा लोक का यह महायज्ञ न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी एक अद्भुत अनुभव साबित हुआ। इसे मातृशक्ति, भक्ति, साधना और सनातन संस्कृति के सशक्त संगम के रूप में देखा जा रहा है।