राजस्थान की पहली ऑर्गेनिक पंचायत को राष्ट्रीय पहचान; केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे बामनवास कांकर का दौरा

Edited By Anil Jangid, Updated: 06 Feb, 2026 12:22 PM

rajasthan first fully organic panchayat gets national recognition

जयपुर। कोटपूतली–बहरोड़ जिले की बामनवास कांकर ग्राम पंचायत राजस्थान की पहली पंचायत है जिसने 100 प्रतिशत खेतों और 100 प्रतिशत पशुधन के साथ पूर्ण ऑर्गेनिक परिवर्तन अपनाया है। इस ऐतिहासिक पहल के लिए गांव को रसायन-मुक्त खेती और टिकाऊ ग्रामीण विकास के...

जयपुर। कोटपूतली–बहरोड़ जिले की बामनवास कांकर ग्राम पंचायत राजस्थान की पहली पंचायत है जिसने 100 प्रतिशत खेतों और 100 प्रतिशत पशुधन के साथ पूर्ण ऑर्गेनिक परिवर्तन अपनाया है। इस ऐतिहासिक पहल के लिए गांव को रसायन-मुक्त खेती और टिकाऊ ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

 

बुधवार को नई दिल्ली स्थित आईसीएआर–पूसा में हुई बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस उपलब्धि पर संज्ञान लिया। उन्होंने बामनवास कांकर के किसानों और कोफेड (Cofarmin Federation of Organic Societies and Producer Companies) को बधाई देते हुए कहा कि यह मॉडल अब भारत की टिकाऊ कृषि का एक आदर्श बन रहा है। मंत्री ने गांव का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद करने की इच्छा भी व्यक्त की।

 

बैठक में कोफेड के संस्थापक जितेन्द्र सेवावत ने किसानों की ओर से ऑर्गेनिक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन प्रीमियम मूल्य (MSPP) लागू करने का मुद्दा उठाया। इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा और उन्होंने बामनवास कांकर आकर किसानों से मिलने की बात दोहराई। सेवावत ने मंत्री को यह भी बताया कि बामनवास कांकर की सफलता से प्रेरित होकर राजस्थान के दो अन्य जिलों में भी ऑर्गेनिक परिवर्तन शुरू हो चुका है:-
-सहजराजसर पंचायत, लूणकरणसर तहसील (बीकानेर जिला)
-ढिकोला पंचायत, शाहपुरा तहसील (भीलवाड़ा जिला)

 

इन प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि ऐसे समुदाय-आधारित प्रयास देश की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

भारतीय कृषि में एक ऐतिहासिक उपलब्धि
पिछले महीने बामनवास कांकर ने इतिहास रचते हुए अपने 1,500 से अधिक हेक्टेयर कृषि क्षेत्र और 6,000 से अधिक पशुओं को ऑर्गेनिक खेती के अंतर्गत ला दिया, जिससे यह पंचायत उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत की उन गिनी-चुनी पंचायतों में शामिल हो गई है, जिन्होंने इतना व्यापक ऑर्गेनिक परिवर्तन किया है। इस उपलब्धि को 2 जनवरी को आयोजित “रासायनिक खेती और पशुपालन के विरुद्ध संकल्प समारोह” के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया, जिसमें किसानों, पशुपालकों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने कीटनाशक-मुक्त खेती, ऑर्गेनिक पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

 

एक समुदाय-नेतृत्वित हरित क्रांति
बामनवास कांकर का यह परिवर्तन गांव की पहल से ही संभव हुआ, जब किसानों ने मिट्टी की गिरती गुणवत्ता, भूजल स्तर में कमी, बढ़ती लागत और रासायनिक खेती से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को महसूस किया। कोफेड इस बदलाव में तकनीकी प्रशिक्षण, ऑर्गेनिक प्रक्रिया सहयोग, किसान क्षमता निर्माण और बाज़ार से जोड़ने का कार्य कर रहा है, ताकि यह परिवर्तन पर्यावरण और अर्थव्यवस्था — दोनों के लिए टिकाऊ बने।

 

राजस्थान में ऑर्गेनिक विस्तार
इस सफलता के आधार पर कोफेड ने 2026 तक बीकानेर, अलवर, कोटपूतली–बहरोड़ और भीलवाड़ा जिलों की 300 पंचायतों को पूरी तरह ऑर्गेनिक बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
पर्यावरणीय लाभों के साथ-साथ इससे किसानों की आय में वृद्धि, खेती की लागत में कमी, पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित भोजन मिलने की उम्मीद है। बामनवास कांकर के किसानों ने पहले ही मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, बेहतर नमी संरक्षण और जैव विविधता में वृद्धि की सूचना दी है।

 

आज बामनवास कांकर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब किसान, संस्थाएं और समुदाय एक साथ आते हैं, तो भारत की टिकाऊ और मजबूत कृषि की ओर बढ़ना न सिर्फ संभव है — बल्कि वह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।

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