Edited By Anil Jangid, Updated: 30 Nov, 2025 03:26 PM

कहते हैं न कि कभी-कभी ज़िंदगी हमें उन रास्तों पर ले जाती है जिसमें अपना अलग मुकाम बना लेते हैं. जयपुर में 25 सालों से कैंसर मरीजों का दर्द कम करने में जुटी रेडियोलॉजिस्ट डॉ.सुषमा महाजन की जिंदगी में कुछ ऐसा ही मोड़ आया है.
-चिकित्सा मेरा पेशा, चित्रकारी मेरा मन - डॉ.सुषमा महाजन
-जयपुर की रेडियोलॉजिस्ट ने पेरिस कला जगत में बनाई ख़ास पहचान
-कोविड काल में पेटिंग्स के शौक ने करियर को दी अलग दिशा
जयपुर- कहते हैं न कि कभी-कभी ज़िंदगी हमें उन रास्तों पर ले जाती है जिसमें अपना अलग मुकाम बना लेते हैं. जयपुर में 25 सालों से कैंसर मरीजों का दर्द कम करने में जुटी रेडियोलॉजिस्ट डॉ.सुषमा महाजन की जिंदगी में कुछ ऐसा ही मोड़ आया है. डॉ.सुषमा महाजन की पेटिंग्स को पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय कला जगत में खूब सराहना मिली है. जयपुर में भगवान महावीर कैंसर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ.सुषमा महाजन की अब नई पहचान यह है कि वो अंतर्राष्ट्रीय फलक पर एक पेशेवर आर्टिस्ट के रूप में पहचान बना रही हैं. अपने सफर को साझा करते हुए डॉ.सुषमा महाजन ने पंजाब केसरी को बताया कि कोरोना काल में एक दिन अचानक वॉटरकलर और ब्रश उठाया और अपनी कल्पनाओं को रंगों का आकार दिया. इसके बाद से अनवरत नई-नई कल्पनाओं और अनुभव को कूंची से कागज पर उकेरती रही . दरअसल, साल 2020 में उनकी बेटी को फाइन आर्ट विषय के लिए एक वॉटरकलर पोस्टर बनाना था । घर में पड़े रंग, यूट्यूब से मिली कुछ सीख और खाली पड़े दो महीनों ने उन्हें पहली बार काग़ज़ पर रंगों को उकेरना शुरु कर दिया. शुरुआत केवल समय बिताने के लिए हुई थी, जल्द ही एक सुखद अनुभव बन गई और फिर धीरे-धीरे उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया. मरीजों को देखने के साथ-साथ अपनी कला और कल्पनाओं में रंग भरने का शगल साल दर साल आगे बढ़ता रहा और लोगों की तारीफों ने हौंसला इस रूप में बढ़ाया कि वे नित नई कृतियों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करती रही.
जयपुर और देश के विभिन्न स्थानों पर लग चुकी हैं प्रदर्शनी
जयपुर में लगातार तीन प्रदर्शनियों के बाद दिल्ली के इंडियान हैबिटाट सेंटर और फिर अल्का पांडेय जैसी जानी-मानी क्यूरेटर की मदद से उनकी जिंदगी को एक नय़ा मोड़ दे दिया. उनकी एक गिलहरी की पेंटिंग इतनी प्रभावशाली लगी कि उसी के आधार पर उन्हें सोलो शो का अवसर मिला। धीरे-धीरे भारतीय मंदिरों की श्रृंखला, वास्तुकला पर आधारित रचनाएँ, घोड़ों की गतिशीलता और वन्यजीवन के चित्रों में उनकी रियलिस्टिक पेंटिंग देखते ही लोगों का मन मोहने लगी.
डॉक्टर के पेशे के साथ पेटिंग को भी देती हैं अलग समय
डॉ.सुषमा महाजन, अपने डॉक्टर के पेशे को बख़ूबी निभाते हुए दिन में दो-तीन घंटे अपने इस आर्ट को देती हैं. अपनी कला और पेशे के बारे में सुषमा कहती हैं कि चिकित्सा मेरा पेशा है और पेटिंग मेरा मन है. राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस नवीन महाजन की पत्नी डॉ.सुषमा महाजन की कलाकृतियों की चमक फ्रांस के पेरिस में खूब दिखी और कई विदेशी कलाकार उनकी कृतियों पर मोहित हुए और उनसे भारतीय शैली की चित्रकारी और परंपराओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली.