Edited By Anil Jangid, Updated: 15 Jun, 2026 02:05 PM

जयपुर। राजस्थान के खनन क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी और लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश में 250 से अधिक खानों के सीमा विवाद अब नई तकनीक आधारित एसओपी के जरिए खत्म होने की ओर बढ़ रहे हैं। इस फैसले...
जयपुर। राजस्थान के खनन क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी और लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश में 250 से अधिक खानों के सीमा विवाद अब नई तकनीक आधारित एसओपी के जरिए खत्म होने की ओर बढ़ रहे हैं। इस फैसले से खनन उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजस्थान में कई खानों की लीज 1970 के दशक में आवंटित की गई थी, जब जमीन की सीमाओं का निर्धारण पारंपरिक तरीकों जैसे ‘जरीब’ (लोहे की चेन) से किया जाता था। उस समय की नाप-जोख आज की आधुनिक तकनीकों की तुलना में अपेक्षाकृत कम सटीक थी। समय के साथ जैसे-जैसे तकनीक विकसित हुई, पहले GPS और अब DGPS (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) के माध्यम से अधिक सटीक माप संभव हुआ।
नई तकनीक के उपयोग से खानों की वास्तविक स्थिति और पुरानी सीमाओं के बीच बड़ा अंतर सामने आने लगा। इसी अंतर के कारण प्रदेश की सैकड़ों खनन इकाइयाँ कानूनी विवादों में फंस गईं और कई स्थानों पर खनन कार्य पूरी तरह से रुक गया। अकेले अलवर जिले में ही दर्जनभर से अधिक महत्वपूर्ण खानों के मामले लंबे समय से अदालतों में लंबित हैं।
इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा तैयार की गई नई एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि खनन भूमि और वन भूमि (Forest Land) के बीच आने वाले सीमा अंतर को आपसी सहमति और तकनीकी समन्वय के आधार पर सुलझाया जाएगा। इसका उद्देश्य विवादों को बढ़ाने के बजाय व्यावहारिक समाधान निकालना है, ताकि खनन गतिविधियां दोबारा सुचारु रूप से शुरू हो सकें।
नई व्यवस्था के तहत सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि DGPS सर्वे के दौरान किसी खदान की भूमि कम या अधिक पाई जाती है, तो उसे जबरन लागू नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में तभी बदलाव माना जाएगा जब लीज होल्डर (खान संचालक) अपनी लिखित सहमति प्रदान करेगा। इससे न केवल खनन उद्योग को स्थिरता मिलेगी, बल्कि वन विभाग को भी अपने क्षेत्र की स्पष्ट सीमाएं सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
इस मुद्दे को लेकर राजस्थान स्टोन क्रेशर एसोसिएशन ने भी सरकार के समक्ष कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ रखी थीं। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए खान एवं भू-विज्ञान विभाग के निदेशक एमपी मीणा ने 22 जून को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी और नई एसओपी के क्रियान्वयन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस नई नीति से वर्षों से लंबित खनन विवादों का समाधान होगा और राज्य के खनन क्षेत्र में स्थिरता आएगी। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। खनन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो राजस्थान देश के खनन सुधारों में एक उदाहरण बन सकता है।