Edited By Anil Jangid, Updated: 29 Sep, 2026 03:00 PM
जयपुर। राजस्थान के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित टेराकोटा एवं दृश्य कलाकार चंद्रशेखर सैन ने समकालीन भारतीय कला के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
जयपुर। राजस्थान के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित टेराकोटा एवं दृश्य कलाकार चंद्रशेखर सैन ने समकालीन भारतीय कला के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनकी उत्कृष्ट टेराकोटा कृति “My Entire World–I” को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी (2026) के तहत प्रतिष्ठित ललित कला अकादमी राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान भारत के दृश्य कला क्षेत्र के प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों में शामिल है।
इस वर्ष चंद्रशेखर सैन राजस्थान से इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयनित होने वाले एकमात्र कलाकार हैं। पुरस्कार सूची में उनका नाम शीर्ष पर है। यह उपलब्धि राजस्थान और भारतीय टेराकोटा कला के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह सम्मान उनकी निरंतर कलात्मक प्रयोगधर्मिता, मौलिक दृष्टिकोण और भारतीय कला परंपराओं को समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत करने के प्रयासों को पहचान देता है।
प्रेरणास्रोतों को समर्पित किया सम्मान
चंद्रशेखर सैन ने इस राष्ट्रीय सम्मान को अपने जीवन और कलायात्रा से जुड़े तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों को समर्पित किया है। इनमें राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्वर्गीय श्री आलोक, प्रसिद्ध वरिष्ठ मूर्तिकार एवं कलाकार हिम्मत शाह तथा पूर्व वरिष्ठ बीबीसी पत्रकार और राजस्थान के पूर्व सूचना आयुक्त नारायण बारेठ शामिल हैं।
कलाकार चंद्रशेखर सैन ने इन सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका स्नेह, मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और उनके काम पर विश्वास उनकी कलायात्रा में लगातार प्रेरणा का स्रोत रहा है।
शैक्षणिक योग्यता और संस्थागत योगदान
डॉ. चंद्रशेखर सैन ने अमेरिका की African Moon University से टेराकोटा विषय में पीएचडी की है। इसके अलावा वे राजस्थान ललित कला अकादमी की वित्त समिति के सदस्य और कोषाध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
कोटा अंतरराष्ट्रीय कला शिविर में महत्वपूर्ण योगदान
वर्ष 2007 में कोटा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कला शिविर में भी चंद्रशेखर सैन ने सक्रिय भागीदारी की थी। इस शिविर के दौरान लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये मूल्य की कलाकृतियां तैयार की गईं, जिन्हें बाद में उन्होंने राजस्थान ललित कला अकादमी के माध्यम से सरकार को दान कर दिया। इसे उनके कला क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदानों में गिना जाता है।
राजस्थान की मिट्टी से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान तक
चंद्रशेखर सैन ने टेराकोटा को केवल पारंपरिक शिल्प तक सीमित न रखते हुए इसे समकालीन दृश्य कला की प्रभावशाली भाषा के रूप में विकसित किया है। उनकी कला में राजस्थान की लोक एवं पुरातात्विक परंपराओं, विशेष रूप से कालीबंगा और मोलेला की विरासत के साथ भारतीय मूर्तिकला की व्यापक परंपराओं की झलक दिखाई देती है।
उनकी कलाकृतियों में स्मृति, प्रकृति, जैविक आकृतियां, पक्षी, पशु, बीज, पेड़ और मानव के आंतरिक संसार जैसे विषय बार-बार देखने को मिलते हैं।
प्रमुख सम्मान और उपलब्धियां
चंद्रशेखर सैन को वर्ष 2026 में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के तहत ललित कला अकादमी राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। इससे पहले उन्हें 2014 में राजस्थान ललित कला अकादमी राज्य कला पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने राजस्थान की टेराकोटा परंपराओं पर शोध के लिए CCRT Junior Fellowship और CSIR-UGC Junior Research Fellowship भी प्राप्त की है।
उनकी देशभर में 10 से अधिक एकल प्रदर्शनियां आयोजित हो चुकी हैं और उन्होंने ललित कला अकादमी, नई दिल्ली की राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भी हिस्सा लिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के माध्यम से स्पेन के Casa de la India, Valladolid में विशेष प्रदर्शनी और व्याख्यान भी दिया है।
राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद चंद्रशेखर सैन ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत कलायात्रा का पड़ाव नहीं है, बल्कि राजस्थान की मिट्टी, संस्कृति और समृद्ध टेराकोटा विरासत की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान भी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें भारतीय टेराकोटा कला में नए प्रयोग करने और राजस्थान की कलात्मक विरासत को व्यापक मंचों तक पहुंचाने के लिए और प्रेरित करेगा।