राजस्थान में होटल-रेस्टोरेंट लाइसेंस शुल्क में बड़ा बदलाव, छोटे कारोबारियों को राहत, हर साल 5% बढ़ेगी फीस

Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Jun, 2026 01:22 PM

rajasthan revises hotel and restaurant license fees get relief

जयपुर। राजस्थान सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैफे और अन्य आतिथ्य कारोबार के लाइसेंस शुल्क को लेकर संशोधित आदेश जारी किया है। मई में लाइसेंस फीस बढ़ाए जाने के बाद होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के विरोध को देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने नई शुल्क...

जयपुर। राजस्थान सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैफे और अन्य आतिथ्य कारोबार के लाइसेंस शुल्क को लेकर संशोधित आदेश जारी किया है। मई में लाइसेंस फीस बढ़ाए जाने के बाद होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के विरोध को देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने नई शुल्क संरचना लागू की है। संशोधित व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई है, जबकि लाइसेंस शुल्क में अब हर वर्ष स्वतः 5 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।

 

सरकार ने पहले लागू व्यवस्था में बदलाव करते हुए होटलों को उनकी क्षमता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है। पहले 50 कमरों तक के सभी होटल एक ही श्रेणी में शामिल थे, जिसके कारण 10 से 15 कमरों वाले छोटे होटल संचालकों को भी 25 हजार रुपये वार्षिक शुल्क देना पड़ता था। नई व्यवस्था में यह शुल्क काफी कम कर दिया गया है।

 

संशोधित आदेश के अनुसार, 10 कमरों तक के होटल का वार्षिक लाइसेंस शुल्क 25 हजार रुपये से घटाकर 7,500 रुपये कर दिया गया है। इससे छोटे होटल संचालकों को 17,500 रुपये की सीधी राहत मिलेगी। वहीं 11 से 25 कमरों तक के होटलों के लिए वार्षिक शुल्क 10 हजार रुपये और 26 से 50 कमरों तक के होटलों के लिए 20 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।

 

रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को भी नई शुल्क संरचना का लाभ मिलेगा। 50 सीट क्षमता तक के नॉन-एसी रेस्टोरेंट और ढाबों का लाइसेंस शुल्क घटाकर 5 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं 50 सीट तक के एसी रेस्टोरेंट का शुल्क 20 हजार रुपये से कम करके 15 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इससे छोटे भोजनालयों की संचालन लागत में कमी आएगी और उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।

 

हालांकि सरकार ने कैफे, बेकरी, मिठाई की दुकान, क्लाउड किचन, जिम और स्विमिंग पूल जैसी अन्य श्रेणियों की लाइसेंस फीस में कोई बदलाव नहीं किया है। इसी तरह 50 कमरों से अधिक क्षमता वाले होटल, बड़े होटल और हैरिटेज होटलों की शुल्क दरें भी पहले की तरह यथावत रहेंगी।

 

सरकार का कहना है कि संशोधित शुल्क संरचना का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को राहत देना और लाइसेंस व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाना है। वहीं हर साल 5 प्रतिशत की स्वचालित वृद्धि के प्रावधान से भविष्य में शुल्क संशोधन की प्रक्रिया भी सरल होगी।

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