Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Jun, 2026 03:35 PM

जयपुर। खरीफ सीजन से पहले राजस्थान सरकार ने अनुदानित उर्वरकों के वितरण को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। कृषि आयुक्तालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अब खाद वितरण को किसान की फार्मर आईडी और भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा...
जयपुर। खरीफ सीजन से पहले राजस्थान सरकार ने अनुदानित उर्वरकों के वितरण को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। कृषि आयुक्तालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अब खाद वितरण को किसान की फार्मर आईडी और भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य कालाबाजारी, जमाखोरी और अनुदानित उर्वरकों की अवैध बिक्री पर रोक लगाना है, ताकि वास्तविक किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके।
नई व्यवस्था के तहत उर्वरक खरीदते समय फार्मर आईडी को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, वे भी जमाबंदी, एफआरए पट्टा, बटाईनामा या किरायानामा जैसे वैध दस्तावेजों के आधार पर अनुदानित खाद प्राप्त कर सकेंगे। इससे किराए पर खेती करने वाले किसानों, बटाईदारों और मृतक किसानों के कानूनी उत्तराधिकारियों को भी राहत मिलेगी।
सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी और दूसरे राज्यों में अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। कृषि विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से चेक पोस्ट स्थापित कर खाद की आवाजाही पर नजर रखेंगे, ताकि राज्य के लिए आवंटित उर्वरक का लाभ राजस्थान के किसानों को ही मिल सके।
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि विक्रेता के पास खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तो किसी भी किसान को उर्वरक देने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। साथ ही सभी विक्रेताओं को मूल्य सूची, उपलब्ध स्टॉक और गोदाम की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक किसान द्वारा खरीदे गए उर्वरक का रिकॉर्ड फार्मर आईडी से जुड़ जाएगा। इससे यह जानकारी उपलब्ध रहेगी कि किस किसान ने कितनी मात्रा में खाद खरीदी और उसका उपयोग किस कृषि क्षेत्र में किया गया।
सरकार ने किसानों की एक और महत्वपूर्ण शिकायत का समाधान करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अनुदानित यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे उर्वरकों की बिक्री के साथ किसी अन्य गैर-अनुदानित उत्पाद की अनिवार्य टैगिंग नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत कार्रवाई होगी।
कृषि विभाग का मानना है कि फार्मर आईडी आधारित यह व्यवस्था भविष्य में फसल बीमा, पीएम किसान सम्मान निधि और अन्य कृषि योजनाओं के लाभ वितरण को भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगी।