Edited By Anil Jangid, Updated: 22 Jun, 2026 01:11 PM

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को मेवाड़ क्षेत्र के महत्वाकांक्षी जल परियोजना देवास-3 और देवास-4 का हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वे किया। उदयपुर संभाग के गोगुंदा तहसील क्षेत्र में पहुंचे मुख्यमंत्री ने अरावली की पहाड़ियों के बीच चल...
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को मेवाड़ क्षेत्र के महत्वाकांक्षी जल परियोजना देवास-3 और देवास-4 का हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वे किया। उदयपुर संभाग के गोगुंदा तहसील क्षेत्र में पहुंचे मुख्यमंत्री ने अरावली की पहाड़ियों के बीच चल रहे बांध निर्माण और सुरंग (टनल) कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
हवाई निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें परियोजना की समय-सीमा, तकनीकी गुणवत्ता और पुनर्वास कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परियोजना को तय समय में उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ पूरा किया जाए तथा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
करीब 1,691 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य झीलों की नगरी उदयपुर की लाइफलाइन मानी जाने वाली पिछोला और फतेहसागर झीलों में सालभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
‘देवास परियोजना’ का मुख्य उद्देश्य साबरमती बेसिन की वाकल नदी के जल को सुरंगों और बांधों के नेटवर्क के माध्यम से उदयपुर की झीलों तक पहुंचाना है। देवास-3 बांध गोगुंदा क्षेत्र के नाल (नाथिया थल) गांव के पास वाकल नदी पर बनाया जा रहा है, जिसकी जल भंडारण क्षमता लगभग 500 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) है। इसके साथ ही यहां 10.38 किलोमीटर लंबी मुख्य टनल का निर्माण किया जा रहा है।
वहीं देवास-4 बांध अंबावा (झांक) गांव के पास विकसित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता भी लगभग 500 MCFT है। यहां से पानी को 3.88 किलोमीटर लंबी लिंक टनल के जरिए देवास-3 तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद यह जलराशि आगे देवास-2 और अन्य जल संरचनाओं के माध्यम से उदयपुर की झीलों तक पहुंचेगी।
यह पूरा सिस्टम ग्रेविटी आधारित टनल इंजीनियरिंग पर काम करेगा, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 1,000 MCFT अतिरिक्त जल उदयपुर की झीलों में पहुंचाने का लक्ष्य है। इससे न केवल शहर की पेयजल समस्या का समाधान होगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलापूर्ति मजबूत होगी।
परियोजना के पूरा होने पर उदयपुर के पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि झीलों में सालभर जलस्तर स्थिर रहने से पर्यटक आकर्षण बढ़ेगा और स्थानीय आजीविका को मजबूती मिलेगी।