मीसा बंदियों के लिए CM भजनलाल का बड़ा ऐलान: पेंशन 25 हजार, मेडिकल अलाउंस बढ़ा और रोडवेज में फ्री यात्रा

Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Jun, 2026 02:00 PM

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जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आपातकाल (Emergency) के 51 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मीसा बंदियों के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। जयपुर के दुर्गापुरा स्थित सियाम में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री...

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आपातकाल (Emergency) के 51 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मीसा बंदियों के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। जयपुर के दुर्गापुरा स्थित सियाम में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उनकी मासिक पेंशन और चिकित्सा सहायता राशि में बढ़ोतरी का ऐलान किया।

 

सरकारी घोषणा के अनुसार, अब राज्य में मीसा बंदियों को मिलने वाली मासिक पेंशन 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इस निर्णय के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 5 हजार रुपये प्रति माह अतिरिक्त पेंशन मिलेगी। इसके साथ ही चिकित्सा सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां 1 हजार रुपये मासिक मेडिकल अलाउंस दिया जाता था, अब इसे बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है, यानी 4 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता।

 

इसके अलावा राज्य सरकार ने मीसा बंदियों को एक और बड़ी राहत देते हुए राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का भी निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत लोकतंत्र सेनानी राज्य भर में रोडवेज बसों में बिना किसी शुल्क के यात्रा कर सकेंगे।

 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय था, जिसमें संविधान और नागरिक अधिकारों का दमन किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया।

 

मीसा बंदी शब्द उन व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है जिन्हें 1975 के आपातकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (MISA) के तहत गिरफ्तार कर जेल में रखा गया था। इनमें विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्हें बाद में लोकतंत्र सेनानी के रूप में भी संबोधित किया जाता है।

 

सरकार का कहना है कि यह निर्णय उन लोगों के सम्मान में लिया गया है जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।

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