राजस्थान विश्वविद्यालय पीएचडी दाखिलों में एआई से दस्तावेज़ों में हेरफेर का खुलासा, 10% आवेदनों में गड़बड़ी की आशंका

Edited By Anil Jangid, Updated: 22 Jun, 2026 12:24 PM

ai based document fraud exposed in rajasthan university phd admissions

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल एडिटिंग टूल्स के माध्यम से दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर का मामला सामने आया है।

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल एडिटिंग टूल्स के माध्यम से दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि करीब 3,000 आवेदनों में से लगभग 10 प्रतिशत में किसी न किसी प्रकार की तकनीकी जालसाजी की गई है, विशेषकर नेट-जेआरएफ सर्टिफिकेट को लेकर।

 

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों द्वारा की गई शिकायतों के बाद दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई थी। जांच में पाया गया कि कई आवेदनों में स्कैन किए गए प्रमाणपत्रों को एआई टूल्स की मदद से संशोधित किया गया है, जिससे अंक, वर्ष और श्रेणी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों में बदलाव किया गया। यह हेरफेर इतनी कुशलता से किया गया था कि सामान्य जांच में इसे पकड़ पाना मुश्किल हो रहा था।

 

सबसे अधिक गड़बड़ी नेट-जेआरएफ सर्टिफिकेट में पाई गई है, जो पीएचडी प्रवेश में वरीयता सूची तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ मामलों में पाया गया कि अभ्यर्थियों ने अलग-अलग वर्षों के परिणामों को मिलाकर एक नया फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किया, जबकि कुछ ने परीक्षा वर्ष या कैटेगरी बदलकर अपने स्कोर को अधिक अनुकूल दिखाने का प्रयास किया।

 

एक अन्य मामले में अभ्यर्थी ने 2024 में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन प्रवेश शर्तों के अनुसार पात्रता पाने के लिए सर्टिफिकेट में परीक्षा वर्ष को बदल दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छात्रों ने परिणाम की विभिन्न कैटेगरी को बदलकर गलत तरीके से उच्च स्कोर प्रदर्शित किया।

 

मामले के उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है और सभी आवेदनों की पुनः गहन जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि सत्यापन के दौरान मूल दस्तावेजों की जांच की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को पकड़ा जा सके।

 

विश्वविद्यालय की कुलगुरु के अनुसार, कुछ शिकायतों के बाद यह मामला सामने आया है और अब प्रत्येक आवेदन को सावधानीपूर्वक जांचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और योग्य अभ्यर्थियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो, यह उनकी प्राथमिकता है।

 

इस घटना ने उच्च शिक्षा में डिजिटल फर्जीवाड़े की नई चुनौती को उजागर किया है, जहां एआई तकनीक का दुरुपयोग कर दस्तावेजों में हेरफेर किया जा रहा है।

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