32 साल बाद हकीकत बनेगा राजस्थान का यमुना जल अधिकार, शेखावाटी के तीन जिलों को होगा फायदा

Edited By Anil Jangid, Updated: 29 Jun, 2026 10:28 AM

rajasthan yamuna water rights to become reality after 32 years

जयपुर: राजस्थान के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित यमुना जल परियोजना आखिरकार धरातल पर उतरने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा चुकी है। दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर मेमोरेंडम...

जयपुर: राजस्थान के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित यमुना जल परियोजना आखिरकार धरातल पर उतरने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा चुकी है। दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूदगी रहने वाली है।

यह समझौता राजस्थान के लिए इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि राज्य को वर्ष 1994 में ही यमुना नदी के जल में हिस्सा मिल गया था, लेकिन आवश्यक आधारभूत ढांचे के अभाव में यह अधिकार केवल कागजों तक ही सीमित रहा। अब करीब 32 वर्षों बाद पहली बार इस हिस्से के पानी को राजस्थान तक पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल की गई है।

क्या है 1994 का यमुना जल समझौता?
12 मई 1994 को केंद्र सरकार की पहल पर यमुना बेसिन के राज्यों के बीच जल बंटवारे का समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत राजस्थान को यमुना नदी के उपलब्ध जल का 10.4 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया। इसके अनुसार राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मिलने का अधिकार है।

हालांकि, पानी को राजस्थान तक लाने के लिए आवश्यक परियोजना और वितरण प्रणाली विकसित नहीं हो सकी। इसी कारण पिछले तीन दशकों तक राजस्थान अपने वैधानिक हिस्से का उपयोग नहीं कर पाया।

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    पाइपलाइन के जरिए पहुंचेगा यमुना का पानी
    राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए नए एमओए का उद्देश्य वर्ष 1994 के जल समझौते को प्रभावी रूप से लागू करना है। प्रस्तावित योजना के अनुसार हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान तक भूमिगत पाइपलाइन बिछाकर यमुना का पानी पहुंचाया जाएगा।

    दोनों राज्य परियोजना के तकनीकी, वित्तीय और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं पर मिलकर काम करेंगे। भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाने से वाष्पीकरण और रिसाव के कारण होने वाले नुकसान में कमी आएगी। साथ ही भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी सीमित रहेगी और पानी को सीधे पेयजल आपूर्ति प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा।

    शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
    इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सबसे बड़ा लाभ राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से सीकर, झुंझुनू और चूरू जिलों के लाखों लोगों को इसका सीधा फायदा होगा। भविष्य में जल वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ अन्य जिलों को भी इस योजना से जोड़ा जा सकता है।

    इन क्षेत्रों में वर्षों से भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। कई इलाकों में फ्लोराइड युक्त और खारे पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यमुना का स्वच्छ पानी उपलब्ध होने से पेयजल संकट कम होने के साथ-साथ लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाला पानी मिलने की उम्मीद है।

    राजस्थान के लिए क्यों है अहम परियोजना?
    राजस्थान देश के उन राज्यों में शामिल है जहां जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में यमुना जल परियोजना केवल एक जल आपूर्ति योजना नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी होती है तो यह राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण पेयजल परियोजनाओं में शामिल होगी। इससे न केवल शेखावाटी क्षेत्र के लाखों लोगों को स्थायी राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश में जल प्रबंधन को भी नई दिशा मिलेगी।

    करीब 32 साल पुराने इस मुद्दे पर बनी सहमति को राजस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह कोई नया जल बंटवारा नहीं है, बल्कि 1994 में मिले राज्य के वैधानिक अधिकार को पहली बार वास्तविक रूप में लागू करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

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