Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Jun, 2026 01:49 PM

जयपुर। राजस्थान में इस वर्ष मानसून को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। मौसम विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अलनीनो के प्रभाव के कारण इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रह सकता है, जिससे राज्य में सामान्य से लगभग 24 प्रतिशत तक कम बारिश होने की...
जयपुर। राजस्थान में इस वर्ष मानसून को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। मौसम विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अलनीनो के प्रभाव के कारण इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रह सकता है, जिससे राज्य में सामान्य से लगभग 24 प्रतिशत तक कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण इसका सीधा असर उत्पादन, ग्रामीण आय और महंगाई पर पड़ सकता है।
राजस्थान, जहां लगभग 70 प्रतिशत कृषि कार्य मानसून की बारिश पर निर्भर करता है, वहां कमजोर वर्षा स्थिति को गंभीर आर्थिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में अनुमानित गिरावट होती है, तो फसलों की पैदावार घटेगी, जिससे किसानों की आय में कमी आएगी और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।
राजस्थान चैंबर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अरुण अग्रवाल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों का असर पहले ही औद्योगिक उत्पादन लागत पर देखा जा रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सीजफायर समझौते के बावजूद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसके कारण उत्पादन लागत में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। अब यदि मानसून कमजोर रहता है तो स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की भागीदारी लगभग 25.74 प्रतिशत है, जबकि राज्य की लगभग 60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में मानसून की अनिश्चितता ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता बाजार दोनों को प्रभावित कर सकती है।
खाद्य उत्पादन विशेषज्ञ अनूप खंडेलवाल का कहना है कि राजस्थान जैसे शुष्क और मरुस्थलीय राज्य के लिए मानसून सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक कारक है। यदि वर्षा कम होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में आय सीमित हो जाती है और लोगों की खरीद क्षमता घटती है, जिससे बाजार में मांग कम हो जाती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 26 जून से 2 जुलाई के बीच पूर्वी राजस्थान के कोटा, उदयपुर, भरतपुर और जयपुर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में केवल कहीं-कहीं बौछारें पड़ सकती हैं। 3 से 9 जुलाई के बीच पूर्वी हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं, लेकिन पश्चिमी राजस्थान में बारिश का वितरण सीमित रहने की आशंका है।
कुल मिलाकर, अलनीनो के प्रभाव से कमजोर मानसून की संभावना ने राजस्थान में कृषि उत्पादन और महंगाई दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।