राजस्थान पंचायत और निकाय चुनाव कब होंगे? आरक्षण और आयोगों के टकराव में अटका चुनावी फैसला

Edited By Anil Jangid, Updated: 13 Jun, 2026 01:42 PM

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जयपुर। Rajasthan में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लगातार देरी का शिकार हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी स्थानीय शासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कार्यकाल पूरा होने के बावजूद इन निकायों में चुनाव नहीं कराए जाने से प्रशासनिक कामकाज अस्थायी व्यवस्थाओं के...

जयपुर। Rajasthan में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लगातार देरी का शिकार हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी स्थानीय शासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कार्यकाल पूरा होने के बावजूद इन निकायों में चुनाव नहीं कराए जाने से प्रशासनिक कामकाज अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे चल रहा है।

 

जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई तक कराए जाएं। इसके बावजूद चुनावी प्रक्रिया अभी भी प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ सकी है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियां तो जारी कर दी गई हैं, लेकिन आरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

 

मुख्य विवाद ओबीसी आरक्षण को लेकर है। राज्य सरकार का कहना है कि पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण निर्धारित किया जाएगा, उसके बाद ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं ओबीसी आयोग को सर्वे और आंकड़े जुटाने का जिम्मा दिया गया है, जिसके चलते प्रक्रिया और लंबी खिंचती जा रही है।

 

दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। आयोग का कहना है कि बिना स्पष्ट आरक्षण ढांचे के चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

 

इस बीच राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सभी पक्ष एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग—तीनों ही संस्थाएं निर्णय की गेंद एक-दूसरे के पाले में डाल रही हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

 

मामला केवल प्रशासनिक नहीं रह गया है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें आयोग और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है।

 

कुल मिलाकर, Rajasthan में पंचायत और निकाय चुनावों का भविष्य आरक्षण की प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय पर टिका हुआ है। यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो हाईकोर्ट की सख्ती और बढ़ सकती है, जिससे राज्य में चुनावी अनिश्चितता और गहरा सकती है।

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