राजस्थान के बॉर्डर इलाकों में मस्जिद-मदरसों पर अब नहीं चलेगा बुलडोजर वक्फ बोर्ड ने निकाला सुरक्षा कवच

Edited By Anil Jangid, Updated: 22 Jun, 2026 02:38 PM

bulldozer action on rajasthan border mosques and madrasas waqf board move

बाड़मेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माणों पर प्रशासन की कार्रवाई के तहत कुछ मस्जिदों और मदरसों पर बुलडोजर चलाए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। जयपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में हुई हालिया कार्रवाइयों ने राज्य में...

बाड़मेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में अवैध निर्माणों पर प्रशासन की कार्रवाई के तहत कुछ मस्जिदों और मदरसों पर बुलडोजर चलाए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। जयपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में हुई हालिया कार्रवाइयों ने राज्य में राजनीतिक और कानूनी बहस को तेज कर दिया है।

 

जयपुर में नूरानी मस्जिद को अवैध निर्माण बताकर ध्वस्त किए जाने की घटना के बाद अल्पसंख्यक समुदाय और वक्फ बोर्ड ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि कई मामलों में दशकों पुराने धार्मिक स्थलों को नोटिस देकर कार्रवाई की गई है, जिससे समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

 

इस स्थिति से निपटने के लिए राजस्थान वक्फ बोर्ड ने सभी मस्जिद और मदरसा प्रबंधन समितियों को नई गाइडलाइन जारी की है। बोर्ड ने निर्देश दिया है कि सभी धार्मिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई या नोटिस प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रह सके। इसके साथ ही स्थानीय वकीलों को समितियों में शामिल करने की सलाह भी दी गई है, ताकि कानूनी प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके।

 

वक्फ बोर्ड का दावा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक धार्मिक संपत्तियों को अतिक्रमण के नाम पर चिन्हित कर कार्रवाई की गई है, जबकि उनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं। बोर्ड का कहना है कि अब सभी संपत्तियों के रेवेन्यू रिकॉर्ड और दस्तावेजों की डिजिटल जांच कर उन्हें अपडेट किया जाएगा।

 

इसी बीच, इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी गहराता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य और केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सीमावर्ती इलाकों में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर लंबे समय से सांप्रदायिक सौहार्द बना हुआ था, लेकिन अब इन कार्रवाइयों से तनाव बढ़ने की आशंका है।

 

गहलोत ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण और कार्रवाई रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि यह कदम सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है।

 

वहीं प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के खिलाफ नियमों के तहत की जा रही है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान में एक नए राजनीतिक और कानूनी टकराव को जन्म दे दिया है, जिसमें वक्फ बोर्ड की नई रणनीति अब चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

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