आपणो जयपुर-हरित संगम के तहत एक पेड़ पूर्वजों के नाम अभियान आज से, 5 लाख परिवारों तक पहुंचेगा कारवां

Edited By Anil Jangid, Updated: 01 Oct, 2026 08:03 PM

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जयपुर। गुलाबीनगरी की आत्मा, संस्कृति, पर्यावरण, परंपराओं और सामाजिक जीवन को फिर से जोड़ने के लिए ‘आपणो जयपुर-हरित संगम’ अभियान 2 अक्टूबर से चलेगा। जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट पर शुक्रवार को एक पेड़ पूर्वजों के नाम लगाकर इसकी शुरुआत की जाएगी।

जयपुर। गुलाबीनगरी की आत्मा, संस्कृति, पर्यावरण, परंपराओं और सामाजिक जीवन को फिर से जोड़ने  के लिए ‘आपणो जयपुर-हरित संगम’ अभियान 2 अक्टूबर से चलेगा। जवाहर सर्किल स्थित पत्रिका गेट पर शुक्रवार को एक पेड़ पूर्वजों के नाम लगाकर इसकी शुरुआत की जाएगी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी होगी। विशिष्ट अतिथि सांसद मंजू शर्मा तथा अध्यक्षता महापौर सुनील कोठारी करेंगे। फिक्की फ्लो की महिला अध्यक्ष नीता बूचरा ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि  उन पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाए जाएंगे, जिन्होंने जयपुर को केवल शहर नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, भाईचारे और जीवन-मूल्यों की पहचान दी। लेकिन यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है। यह अगले 10 साल की सामाजिक यात्रा का पहला कदम है।

 

घर से शुरू होगा अभियान
बूचरा ने बताया कि इसकी शुरुआत किसी सरकारी योजना या बड़े मंच से नहीं, बल्कि जयपुर के उन लोगों के घरों से हुई, जिनके दिल में शहर की धड़कन बसती है। किसी ने अपने घर में पौधे लगाए, किसी ने कचरा अलग करना शुरू किया, किसी ने मोहल्ले में सफाई की जिम्मेदारी उठाई, किसी ने मंदिर-श्मशान या सामुदायिक केंद्र के संरक्षण की पहल की। छोटे-छोटे प्रयास जुड़ते गए और अब जयपुर में करीब 1000 समूह तैयार हो चुके हैं। प्रत्येक समूह में लगभग 15 से 20 घर जुड़े हैं। अब इन्हीं समूहों को अभियान की ताकत बनाया जाएगा।

 

तीन महीने में जोड़ेंगे पांच लाख परिवार
शहर के समाजसेवी व पर्यावरणविद अशोक मित्तल ने कहा कि अगले तीन महीनों में कम से कम 50 हजार घरों को सीधे जोड़ने और जनजागरण के जरिए करीब 5 लाख परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य है। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और विद्यार्थियों की अलग-अलग टीमें बनाई जा रही हैं, जो अपने क्षेत्रों में अभियान को आगे बढ़ाएंगी। कार्यक्रम समन्वयक अशोक दाधीच ने पत्रकारों से कहा कि अभियान का एक बड़ा लक्ष्य है—जयपुर के घरों से निकलने वाले कचरे की मात्रा कम करना। इसके लिए गीले कचरे से खाद बनाने की ट्रेनिंग महिलाओं को दी जाएगी। पहले चरण में 1000 समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण मिलेगा और फिर वे अपने मोहल्लों में घर-घर जाकर दूसरी महिलाओं को इसकी जानकारी देंगी। लक्ष्य केवल कचरा अलग करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें घर का जैविक कचरा घर में ही खाद बने और उपयोग में आए। हर घर में कम से कम तीन पौधे लगाने और उनके संरक्षण के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। भविष्य की कल्पना यह है कि जयपुर में घर से निकलने वाला खाने-पीने का कचरा कचरा गाड़ी में डालने के बजाय उपयोगी संसाधन बने। इसके लिए एक व्यवस्थित मॉडल तैयार किया जा रहा है।

 

लोकगीतों में फिर सुनाई देगी जयपुर की आवाज
समरस भारत के सचिव धनंजय सिंह ने कहा कि जयपुर की पहचान सिर्फ हवेलियों, मंदिरों और बाजारों में नहीं है। उसकी असली पहचान उसके लोगों की जीवनशैली और लोकसंस्कृति में भी है। इस अभियान में तेजी से लुप्त हो रहे पारंपरिक लोकगीतों को फिर से सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाने की पहल होगी। महिलाओं की टोलियां विवाह, त्योहारों और दूसरे सामाजिक अवसरों पर गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों को जीवंत करेंगी। तीज, गणगौर, नवरात्र, गरबा, होली और अन्य उत्सवों में लोकगीतों को बढ़ावा दिया जाएगा। महिलाओं को गीत सिखाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास होंगे। यानी हरित संगम केवल पेड़ नहीं लगाएगा, जयपुर की सांस्कृतिक जड़ों को भी सींचेगा। मंदिरों, श्मशानों और सामुदायिक केंद्रों के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर समूह बनाए जाएंगे। जहां जरूरत होगी, वहां श्रमदान और सामाजिक अंशदान से विकास और संरक्षण के प्रयास होंगे। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों को भी समाज के सहयोग से बेहतर बनाने की पहल की जाएगी। अभियान का संदेश स्पष्ट होगा कि जो स्थान पूरे समाज के हैं, उनकी जिम्मेदारी भी पूरे समाज की है। अभियान में खेल और योग को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस अभियान में  विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों और युवाओं को खेल से जोड़ने के साथ शहरवासियों में शारीरिक स्वास्थ्य और आपसी सहयोग की भावना विकसित की जाएगी। इसके साथ एक नया विचार ‘मोबाइल फास्टिंग’ भी अभियान का हिस्सा होगा कुछ समय मोबाइल से दूरी, परिवार के साथ संवाद, बच्चों के साथ समय और स्वयं के भीतर झांकने का अवसर।

 

बच्चों रहेंगे अग्रिम पंक्ति में
इस अभियान में स्कूली बच्चों को जोड़ा जाएगा। स्कूलों में स्वच्छता, पर्यावरण, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी के कार्यक्रम है।

 

प्लास्टिक, नशे और भिक्षावृत्ति के खिलाफ जनजागरण
प्लास्टिक मुक्त जयपुर के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। नशे के खिलाफ सामाजिक चेतना पैदा करने और भिक्षावृत्ति के मुद्दे पर जनजागरण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्रशासन के सहयोग से भी अभियान चलाया जाएगा। महिलाओं में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए भी सामाजिक स्तर पर जागरूकता और सहभागिता बढ़ाई जाएगी।

 

एक पेड़ से शुरू होगी 10 साल की यात्रा
2 अक्टूबर को जवाहर सर्किल के पत्रिका गेट पर लगाया जाने वाला ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ का पौधा सिर्फ एक पौधा नहीं होगा। यह उस सोच का प्रतीक होगा कि जिस शहर को पूर्वजों ने बनाया, उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए और बेहतर बनाना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है। हरित संगम का लक्ष्य जयपुर को केवल स्वच्छ और हरित बनाना नहीं, बल्कि ऐसा नागरिक स्वभाव तैयार करना है जिसमें शहर के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी, संस्कार और सहभागिता रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन जाए। क्योंकि अंततः शहर सरकारों से नहीं, शहरवासियों के स्वभाव से बनते हैं। इसीलिए इस 10 साल की यात्रा का सबसे बड़ा संकल्प है।

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