Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 28 Sep, 2026 06:19 PM
अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 250 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
जयपुर। पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत से जयपुर की जनता को रूबरू कराने के लिए ‘ऑक्टेव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर के सहयोग से यह चार दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन 1 से 4 अक्टूबर 2026 तक होगा।
‘ऑक्टेव 2026’ में पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की लोक एवं शास्त्रीय नृत्य परंपराएं, संगीत, पारंपरिक परिधान, शिल्प, चित्रकला और खानपान एक ही मंच पर देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम का उद्घाटन 1 अक्टूबर को शाम 7 बजे राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में होगा।
राज्यपाल बागडे होंगे मुख्य अतिथि
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि उद्घाटन समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समारोह की अध्यक्षता करेंगे। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक निहाल चंद गोयल भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।
डॉ. दलवी के अनुसार ‘ऑक्टेव’ केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की कला, संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना है।
250 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
‘ऑक्टेव 2026’ में 250 से अधिक लोक कलाकार हिस्सा लेंगे। इन कलाकारों की प्रस्तुतियों को तरुण प्रधान कोरियोग्राफ करेंगे। वहीं कार्यक्रम का आकर्षक एंबियंस कोलकाता के अनूप गिरी ने डिजाइन किया है।
चार दिवसीय आयोजन में पूर्वोत्तर की ऐसी लोक कलाओं को मंच मिलेगा, जिनका संबंध वहां के जनजीवन, प्रकृति, कृषि, पर्व, वीरता और लोक आस्थाओं से रहा है।
असम का बारदोई सिकला और बिहू, नागालैंड का नागा युद्ध नृत्य, मेघालय का वांगला, मिजोरम का चेराव यानी बांस नृत्य और सरलामकाई प्रमुख आकर्षण होंगे।
मणिपुर की कला और युद्ध परंपराओं की झलक
मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत भी विभिन्न प्रस्तुतियों के जरिए सामने आएगी। इनमें पुंग चोलोम, थांग-ता, लाई हराओबा और चेरोल जागोई जैसी प्रस्तुतियां शामिल हैं।
पुंग चोलोम में ढोल वादन और नृत्य का प्रभावशाली संगम देखने को मिलेगा, जबकि थांग-ता के जरिए मणिपुर की पारंपरिक युद्धकला की झलक प्रस्तुत की जाएगी।
मणिपुरी रास और सत्रिया नृत्य रहेंगे खास
2 और 3 अक्टूबर को मणिपुरी रास की प्रस्तुति होगी। राधा-कृष्ण के प्रेम और गोपियों की भक्ति पर आधारित इस शास्त्रीय नृत्य में भाव, लय और नृत्य की सुरुचिपूर्ण गतियों का प्रदर्शन होगा।
वहीं 3 और 4 अक्टूबर को असम का सत्रिया नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। श्रीमंत शंकरदेव द्वारा प्रवर्तित इस शास्त्रीय नृत्य परंपरा में भक्ति और नाटकीय अभिव्यक्ति का समन्वय देखने को मिलेगा।
सिंघी छम से होजागिरी तक पूर्वोत्तर के रंग
कार्यक्रम में सिक्किम का सिंघी छम यानी स्नो लायन नृत्य और तमांग सेलो, त्रिपुरा का होजागिरी और ममिता, जबकि अरुणाचल प्रदेश का जुजु-झा-झा और ताई खामती नृत्य भी प्रस्तुत किया जाएगा।
इन प्रस्तुतियों के जरिए पूर्वोत्तर के अलग-अलग राज्यों की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को जयपुर के दर्शकों के सामने पेश किया जाएगा।
पारंपरिक परिधानों में दिखेगी आठ राज्यों की पहचान
1 और 2 अक्टूबर को एथनिक कॉस्ट्यूम शो आयोजित किया जाएगा। इसमें पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के पारंपरिक परिधान और आभूषण प्रदर्शित किए जाएंगे।
इन परिधानों के जरिए अलग-अलग समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, रीति-रिवाज और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
नागालैंड का समूह गायन और रॉक बैंड भी आकर्षण
3 अक्टूबर को नागालैंड का समूह गायन आयोजित होगा, जिसमें वहां की सामूहिक गायन परंपरा के साथ लोक और समकालीन संगीत का संगम देखने को मिलेगा।
वहीं 4 अक्टूबर को समापन समारोह में सत्रिया और विभिन्न लोक नृत्यों के साथ नागालैंड के ‘डिवाइन कनेक्शन’ रॉक बैंड की प्रस्तुति होगी। इस तरह पारंपरिक लोक और शास्त्रीय कलाओं के साथ पूर्वोत्तर की आधुनिक संगीत अभिव्यक्ति भी उत्सव का हिस्सा बनेगी।
नॉर्थ-ईस्ट पेंटर्स कैंप में 10 कलाकार होंगे शामिल
ऑक्टेव से पहले 28 सितंबर से सात दिवसीय नॉर्थ-ईस्ट पेंटर्स कैंप का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर केंद्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली के सहयोग से होगा।
इसमें पूर्वोत्तर के 10 कलाकार हिस्सा लेकर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। शिविर में त्रिपुरा, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और मणिपुर के कलाकार शामिल होंगे।
पूर्वोत्तर की कला और चुनौतियों पर सेमिनार
1 और 2 अक्टूबर को दो दिवसीय सेमिनार भी आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से 12 शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
सेमिनार में पूर्वोत्तर के जनजीवन, सांस्कृतिक विशिष्टताओं, पारंपरिक कलाओं, बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश और मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा होगी। सेमिनार के संयोजक सिक्किम विश्वविद्यालय के प्रो. संतोष कुमार होंगे।
शिल्प मेला और पूर्वोत्तर के व्यंजनों का स्वाद
‘ऑक्टेव 2026’ केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहेगा। 1 से 4 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक शिल्प मेला भी लगाया जाएगा।
इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत के शाकाहारी व्यंजन भी आयोजन का विशेष आकर्षण होंगे। दर्शकों को एक ही परिसर में पूर्वोत्तर के शिल्प, कला, संस्कृति और खानपान को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
राजस्थान में 10 साल बाद तीसरी बार ऑक्टेव
राजस्थान में ‘ऑक्टेव’ का आयोजन करीब 10 साल बाद तीसरी बार हो रहा है। इससे पहले 2012 में जोधपुर और 2016 में अजमेर में ऑक्टेव आयोजित किया गया था।
‘ऑक्टेव’ की शुरुआत नवंबर 2008 में गोवा से हुई थी। इसके बाद देश के अलग-अलग शहरों में इसका आयोजन किया गया। कोविड-19 के चलते 2020 और 2021 में आयोजन नहीं हुआ। वर्ष 2026 में जयपुर को इस सांस्कृतिक आयोजन की मेजबानी मिली है।
चार दिनों तक चलने वाले ‘ऑक्टेव 2026’ के जरिए जयपुरवासियों को पूर्वोत्तर भारत की लोक एवं शास्त्रीय कला, संगीत, परिधान, चित्रकला, शिल्प और खानपान की बहुरंगी दुनिया को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।