पत्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा दिखाने का काम करें- वासुदेव देवनानी

Edited By Anil Jangid, Updated: 30 Jan, 2026 06:47 PM

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पत्रकारों का आह्वान किया है कि वे सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा दिखाने और मार्गदर्शन देने का कार्य करें। साथ ही लोकतन्त्र को मजबूत बनाने एवं नई...

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पत्रकारों का आह्वान किया है कि वे सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर सकारात्मक पत्रकारिता के माध्यम से समाज को नई दिशा दिखाने और मार्गदर्शन देने का कार्य करें। साथ ही लोकतन्त्र को मजबूत बनाने एवं नई पीढ़ी में देश भक्ति की भावना पैदा करने और हमारे देश की सनातन संस्कृति को उजागर करने का काम भी करे तभी भारत विश्व का सिरमोर बन सकेगा।

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विधानसभाध्यक्ष देवनानी गुरुवार सायं जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में नेशनल मीडिया फाउंडेशन,नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

 

देवनानी ने पत्रकारों से अपील की कि वे लोकतन्त्र के चौथे स्तंभ की अपनी भूमिका का सही अर्थों में पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत @ 2047 की कल्पना को साकार करने में सहभागी बनें । उन्होंने बताया कि आज भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने जा रहा है और भविष्य में भारत के दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक  ताकत बनने की भी उम्मीद है। विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि भारत ने कभी आक्रमण के जरिए दुनिया पर अपना दबदबा बनाना नहीं चाहा। हमारा महान देश किसी तरह विश्व की महाशक्ति भी बनना नहीं चाहता बल्कि, हम अपने सनातन मूल्यों के द्वारा पूरे विश्व के लिए एक महान मार्गदर्शक बनना चाहते है और दुनिया के महानायक बन कर विश्व में शान्ति, सद्भाव, प्रेम, विश्वास और अपनत्व की भावना विकसित करने में विश्वास रखते है। पूरी दुनिया हमारा अपना परिवार हैं तथा विश्व बंधुत्व और अहिंसा हमारा मूल मंत्र है, जिसके कारण हम पहले भी विश्व गुरु थे,आज भी है और आगे भी विश्व गुरु बने रहेंगे।

 

देवनानी ने कहा कि आज विश्व की परिस्थितियों एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है। ऐसे में पत्रकारों को सत्य को उजागर कर जन जागरण के कार्य में अपनी महती भूमिका को निभाना होगा। आज हमारे पड़ोसी देश बांगला देश में हो रहे मानवाधिकारों के हनन की घटनाओं को लेकर कोई भी नहीं बोल रहा, ऐसे में भारतीय मीडिया को विश्व के सामने सही तस्वीर को उजागर करने के लिए आगे आना चाहिए। साथ ही अपनी गुरुत्तर जिम्मेदारियों को समझते हुए ऐसी कोई भी अतिरंजित खबरे देने से भी परहेज करना चाहिए जिससे भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं को तनिक भी खतरा उत्पन्न हो जाए।

 

नेशनल मीडिया फाउंडेशन द्वारा पत्रकारों की विभिन्न सुविधाओं और पत्रकारों के लिए सुरक्षा कानून बनाने संबंधी मांग पर टिप्पणी करते हुए देवनानी ने कहा कि सबसे पहले तो आप सभी को ही एकजुट होने की जरूरत है तथा सही राजनीतिक दृष्टिकोण रखते हुए अपने आसक्त होने और अनासक्ति के बारे में मनन और विवेचना करनी चाहिए। 

 

देवनानी ने पत्रकारों को आत्ममंथन करने की सीख भी दी और कहा कि पहले अख़बारों की दिशा और दशा तय करने में संपादक की निर्णायक भूमिका होती थी, आज वही अधिकार धीरे-धीरे मालिकों के हाथों में सिमटता जा रहा है। परिणामस्वरूप संपादकीय स्वतंत्रता सिमट रही है और पत्रकारिता पर व्यावसायिक हित हावी होते दिखाई देते हैं। समाचार चयन से लेकर प्रस्तुति तक, लाभ और प्रभाव का दबाव साफ़ महसूस किया जा सकता है। ऐसे में मीडिया का लोकतांत्रिक चरित्र कमजोर पड़ता है। जब तक अख़बारों की बागडोर पुनः पत्रकारों और संपादकों के हाथों में नहीं आती, तब तक मीडिया सही अर्थों में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ बनने की अपनी भूमिका पूरी नहीं कर पाएगा।उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार ने अन्य प्रदेशों की तुलना में पत्रकारों के हितों का अधिक ध्यान रखते हुए उनकी पेंशन,चिकित्सा आदि सुविधाओं के संबंध में सकारात्मक कदम उठाए है। अन्य प्रदेशों को भी इनका अनुकरण करना चाहिए।

 

विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि आज मीडिया में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के कई स्वरूप हो गए है लेकिन आज भी प्रिंट मीडिया का महत्व कम नहीं हुआ है। ऐसे में पत्रकारों को अपने उत्तरदायित्वों को पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन और आपातकाल में पत्रकारों की भूमिका अहम रही थी। आज इसी मिशनरी भावना से पत्रकारों को महाराणा प्रताप और सूरजमल जैसे राजस्थान के वीर सपूतों और रणबांकुरों की वीर गाथाओं, पन्ना धाय और मीरा जैसी विभूतियों के साथ राजस्थान के समृद्ध इतिहास, कला, संस्कृति, हेरिटेज, पर्यटन आदि को प्रमुखता से उजागर करने में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए। साथ ही गहराई में जाकर सत्य को उजागर करना चाहिए और जन सरोकारों को प्रमुखता देते हुए तथा समाज की प्रतिभाओं को आगे लाने का काम करना एवं  सामाजिक परिवर्तन का वाहक बनते हुए जनता की आवाज बनना चाहिए। 

 

उन्होंने अपने शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में अकबर महान के स्थान पर महाराणा प्रताप महान पाठ को जोड़ने तथा नई पीढ़ी के बालकों को देश के महान नायकों के बारे में जानकारी देने के लिए  200  महापुरुषों की जीवनियों को पाठ्यक्रम में जोड़ने के बारे में भी जानकारी दी और पत्रकारों से अपील की कि वे राजस्थान के शौर्य, वीरता, त्याग, संघर्ष और विजयी इतिहास को नई पीढ़ी के सामने लाने का कार्य करे ताकि देश का भावी नागरिक हमारी सभ्यता और संस्कृति से सुसंस्कृत हो सके।

 

इस अवसर पर विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने नेशनल मीडिया फाउंडेशन की स्मारिका का लोकार्पण करने के साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों और समाज सेवा से जुड़े लोगों को अवॉर्ड और स्मृति चिन्ह प्रदान किए। प्रारम्भ में नेशनल मीडिया फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र जैन ने विधानसभाध्यक्ष देवनानी का स्वागत किया और राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. ओ. पी. यादव ने फाउंडेशन की अब तक की उपलब्धियों और गतिविधियों की जानकारी दी और बताया कि सम्मेलन में 11 प्रदेशों के पत्रकार प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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