Edited By Anil Jangid, Updated: 23 Jan, 2026 06:08 PM

नई दिल्ली। नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल में कर्तव्य पथ पर राजस्थान की उस्ता कला झांकी के नजारे ने दर्शकों को मंत्र मुग्घ कर दिया। रिमझिम बारिश में भी बीकानेर की उस्ता कला का प्रदर्शन देख दर्शक मोहित हो गए।
नई दिल्ली। नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल में कर्तव्य पथ पर राजस्थान की उस्ता कला झांकी के नजारे ने दर्शकों को मंत्र मुग्घ कर दिया। रिमझिम बारिश में भी बीकानेर की उस्ता कला का प्रदर्शन देख दर्शक मोहित हो गए।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के राष्ट्रीय फलक पर प्रदेश के बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला को केन्द्र में रखकर तैयार की गई राजस्थान की झांकी अपनी विशिष्ट शिल्पकला, सांस्कृतिक वैभव और जीवंत प्रस्तुति की अमिट छाप छोड़ेगी।
झांकी के डिजाइनर एवं पर्यवेक्षक हरशिव शर्मा ने बताया कर्तव्य पथ पर शुक्रवार को राजस्थान मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषयक राजस्थान की झांकी के अग्र भाग में राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य रावणहट्टा का वादन करते कलाकार की 180 डिग्री घूमती प्रतिमा प्रदर्शित की गई। इसके दोनों ओर उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी और दीपक आकर्षक फ्रेमों में लगाए गए हैं। झांकी का यह भाग लगभग 13 फीट ऊँचा है।
शर्मा ने बताया कि झाँकी के ट्रेलर भाग में उस्ता कला से अलंकृत घूमती हुई पारंपरिक कुप्पी तथा हस्तशिल्प पर कार्य करते कारीगरों के दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं, जो इस कला की जीवंत परंपरा को दर्शाते हैं। पृष्ठभाग में विशाल ऊँट और उस पर सवार ऊँट की प्रतिमा राजस्थान की मरुस्थलीय संस्कृति एवं लोक जीवन का सशक्त प्रतीक बनी हुई है। दोनों ओर उस्ता कला से सजे मेहराबों में पत्तेदार स्वर्ण कारीगरी के उत्कृष्ट उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं।
शर्मा ने बताया कि झांकी के दोनों ओर गेर लोक नृत्य प्रस्तुत करते कलाकारों ने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया।इस प्रकार यह झांकी पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और शाही विरासत का सजीव संगम बनकर सामने आई।
राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ रजनीश हर्ष ने बताया कि इस झांकी का निर्माण राज्य की उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता तथा उप सचिव अनुराधा गोगिया के मार्गदर्शन में किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह झाँकी 26 जनवरी के मुख्य समारोह में अतिथियों और दर्शकों के मुख्य आकर्षण का केन्द्र बनेगी। विशेष कर बीकानेर की विश्व प्रसिद्ध उस्ता कला, उसके उत्पाद और चटक रंगों की वेशभूषा में लोक कलाकार कर्तव्य पथ पर समा बांधेगे।