Edited By Anil Jangid, Updated: 16 Jan, 2026 06:34 PM

जयपुर। भाजपा सरकार द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के विभिन्न समाजों, विशेषकर पिछड़े वर्ग (OBC) और दलित समुदायों के लिए छात्रावास निर्माण हेतु आवंटित की गई जमीनों को रद्द किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है।...
जयपुर। भाजपा सरकार द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के विभिन्न समाजों, विशेषकर पिछड़े वर्ग (OBC) और दलित समुदायों के लिए छात्रावास निर्माण हेतु आवंटित की गई जमीनों को रद्द किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने इस निर्णय को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण, बल्कि संकुचित और प्रतिशोध की भावना से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों के भविष्य पर कुठाराघात है।
कांग्रेस का तर्क है कि उनकी सरकार ने ये भूमि आवंटन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना के तहत किए थे। गांव-ढाणी और दूरदराज के इलाकों से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए शहरों में उच्च शिक्षा हासिल करना आज भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में छात्रावासों की उपलब्धता उनके लिए न केवल शिक्षा का रास्ता खोलती है, बल्कि सुरक्षित और अनुकूल वातावरण भी प्रदान करती है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में छात्रावासों की कमी के कारण OBC, दलित और अन्य वंचित वर्गों के कई होनहार विद्यार्थी बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। आवास की समस्या, बढ़ता खर्च और असुरक्षित माहौल उनके सपनों के आड़े आ जाता है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने इन समस्याओं को समझते हुए छात्रावास निर्माण के लिए जमीन आवंटन का निर्णय लिया था, ताकि समाज के इन वर्गों के छात्र बिना किसी बाधा के उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।
भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन सत्ता का अहंकार इतना नहीं होना चाहिए कि राजनीतिक द्वेष के चलते जनहितकारी योजनाओं को ही समाप्त कर दिया जाए। कांग्रेस का आरोप है कि जमीन आवंटन रद्द करने का फैसला सामाजिक उत्थान की प्रक्रिया को रोकने और पिछड़े वर्गों को शिक्षा से दूर रखने जैसा कदम है, जो संविधान में निहित सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है।
कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस फैसले पर पुनर्विचार करें और छात्रावास निर्माण के लिए किए गए इन जनहितकारी आवंटनों को तत्काल बहाल करें। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर विश्वास करती है, तो उसे युवाओं के भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसलों में राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेना चाहिए। फिलहाल, इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इसे लेकर आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।