राजस्थान की झाँकी बनी आकर्षण का केन्द्र, नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर उस्ता कला का होगा प्रदर्शन

Edited By Anil Jangid, Updated: 22 Jan, 2026 08:03 PM

rajasthan usta art to shine at republic day parade in new delhi

जयपुर।। गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर “राजस्थान : मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषय पर निकलने वाली राजस्थान की झांकी दिल्ली केंट स्थित आर आर कैम्प रंगशाला में गुरुवार को सायं हुए प्रेस प्रिव्यू में सभी के आकर्षण का केन्द्र...

जयपुर। गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर “राजस्थान : मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषय पर निकलने वाली राजस्थान की झांकी दिल्ली केंट स्थित आर आर कैम्प रंगशाला में गुरुवार को सायं हुए प्रेस प्रिव्यू में सभी के आकर्षण का केन्द्र बनी। बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला को केंद्र में रख तैयार की गई इस झाँकी की विशिष्ट शिल्प कला और सांस्कृतिक वैभव ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

 

झांकी के अग्र भाग में राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य रावणहट्टा बजाते कलाकार की प्रतिमा प्रदर्शित की गई है, जो 180 डिग्री घूमती हुई दिखाई देती है। इसके दोनों ओर उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी और दीपक फ्रेमों में लगाए गए हैं। झांकी का यह भाग लगभग 13 फीट ऊँचा है।झांकी के ट्रेलर भाग में घूमती हुई पारंपरिक कुप्पी को उस्ता कला से अलंकृत कर प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही पारंपरिक हस्तशिल्प पर कार्य करते कारीगरों के दृश्य दिखाए गए हैं, जो इस कला की जीवंत परंपरा को दर्शाते हैं। पृष्ठभाग में विशाल ऊँट और ऊँटसवार की प्रतिमा राजस्थान की मरुस्थलीय संस्कृति और लोकजीवन का प्रतीक बनी हुई है। दोनों ओर उस्ता कला से सजे मेहराबों में विभिन्न सामग्रियों पर की गई पत्तेदार स्वर्ण कारीगरी के उदाहरण भी प्रदर्शित किए गए हैं।

 

झांकी के चारों ओर गेर लोक नृत्य प्रस्तुत करते कलाकारों ने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त रूप में प्रस्तुत किया। कुल मिलाकर राजस्थान की यह झांकी पारंपरिक कला, लोक संस्कृति और शाही विरासत का प्रभावशाली संगम बनकर सामने आई।

 

झाँकी  के डिजाइनर और पर्यवेक्षक हरशिव कुमार शर्मा ने बताया कि नई दिल्ली में 23 जनवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में  कर्तव्य पथ पर निकलने वाली केन्द्र और राज्यों की झांकियों में राजस्थान की इस खूबसूरत झांकी में बीकानेर की उस्ता कला का भव्य प्रदर्शन होगा। राजस्थान ललित कला अकादमी  के सचिव डॉ रजनीश हर्ष ने बताया कि इस झाँकी को राज्य की उप मुख्यमंत्री और पर्यटन,कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी,अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता तथा उप सचिव अनुराधा गोगिया के मार्गदर्शन में बनाया गया है। 

 

उल्लेखनीय है कि उस्ता कला ऊँट की खाल पर की जाने वाली स्वर्ण जड़ाई की पारंपरिक शाही कला है, जिसकी उत्पत्ति ईरान में मानी जाती है। इसका विकास मुगल काल में हुआ। यह कला बीकानेर के महाराजा राय सिंह के शासनकाल में बीकानेर पहुँची,जहाँ स्थानीय कारीगरों ने इसे विशिष्ट पहचान दिलाई। इस कला में 24 कैरेट स्वर्ण पत्र और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है, जिससे इसकी चमक लंबे समय तक बनी रहती है। पहले यह कला केवल ऊँट की खाल से बनी पानी की बोतलों, लैम्प और सजावटी वस्तुओं तक ही सीमित थी, लेकिन अब इसका विस्तार लकड़ी, संगमरमर, कांच और दीवारों तक हो चुका है।बीकानेर की उस्ता कला को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) भी प्राप्त है, जो इसकी मौलिकता और सांस्कृतिक महत्व को प्रमाणित करता है।

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