हरित राजस्थान अभियान को मिलेगा नया आयाम, शहरों के प्रमुख मार्गों पर लगेंगे 12 फीट ऊंचे पौधे, पार्कों के रख-रखाव पर भी सख्ती

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 29 Jun, 2026 07:50 PM

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राजस्थान सरकार ने आगामी वर्षा ऋतु में प्रदेशभर के शहरों को अधिक हरित और सुंदर बनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है।

जयपुर। राजस्थान सरकार ने आगामी वर्षा ऋतु में प्रदेशभर के शहरों को अधिक हरित और सुंदर बनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी करते हुए शहरों के प्रमुख मार्गों के दोनों ओर करीब 12 फीट ऊंचाई वाले विकसित पौधे लगाने और पार्कों के रख-रखाव को लेकर सख्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (शहर) 2.0 के प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों को भेजे गए सुझाव पत्र के बाद अमल में लाई जा रही है। विभाग ने उनके सुझावों को स्वीकार करते हुए व्यापक स्तर पर हरित राजस्थान अभियान लागू करने का निर्णय लिया है।

प्रमुख सड़कों पर लगेंगे विकसित पौधे

स्थानीय निकाय विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में प्रमुख सड़कों की पहचान कर दोनों ओर विकसित और बड़े पौधे लगाने होंगे। सरकार का उद्देश्य केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि कम समय में शहरों में घनी हरियाली विकसित करना, प्रदूषण कम करना और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है।

पार्कों की सफाई और रख-रखाव पर विशेष जोर

डीएलबी ने प्रदेश के पार्कों और उद्यानों की वर्तमान स्थिति पर भी चिंता जताई है। विभाग के अनुसार कई पार्कों में घास, फूलों के पौधे, फव्वारे और अन्य सुविधाओं का नियमित रख-रखाव नहीं होने से उनकी सुंदरता प्रभावित हो रही है।

निर्देशों के तहत सभी नगरीय निकायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि—

  • पार्कों में नियमित सफाई हो।

  • बंद पड़े फव्वारों को दोबारा चालू किया जाए।

  • पौधों और हरियाली की लगातार निगरानी की जाए।

  • पार्कों में सुझाव पुस्तिका उपलब्ध कराई जाए, ताकि नागरिक अपनी शिकायत और सुझाव दर्ज करा सकें।

  • किए गए कार्यों की रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाए।

डूंगरपुर मॉडल बना प्रेरणा

के.के. गुप्ता के नगर परिषद डूंगरपुर के सभापति कार्यकाल के दौरान शहर में वृक्षारोपण की परंपरा को नई दिशा मिली थी। छोटे पौधों के बजाय 10 से 12 फीट ऊंचाई वाले विकसित वृक्ष लगाने की शुरुआत की गई, जिससे कम समय में शहर में हरियाली दिखाई देने लगी।

हर वर्ष लगभग 5 हजार पौधे लगाने के लक्ष्य के साथ पांच वर्षों में 25 हजार से अधिक विकसित वृक्ष लगाए गए। इसके बाद डूंगरपुर की पहचान हरित शहर के रूप में मजबूत हुई।

आधुनिक सुविधाओं से विकसित हुए पार्क

डूंगरपुर के विभिन्न पार्कों में हरियाली के साथ आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की गईं। इनमें हरी घास, छायादार पेड़, फूलों की क्यारियां, बच्चों के झूले, ओपन जिम, फव्वारे, आरओ पेयजल, शौचालय और चौकीदार की व्यवस्था शामिल रही। इन सुविधाओं की नियमित निगरानी के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

पर्यावरण और पर्यटन को मिला बढ़ावा

डूंगरपुर में रिंग रोड क्षेत्र और बर्ड सेंचुरी पार्क विकसित कर पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दिया गया। गैप सागर झील में आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए वॉच टावर बनाया गया, जिससे यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना।

इसके अलावा प्रताप नगर में नक्षत्र पार्क और वसुंधरा विहार में तीर्थंकर पार्क जैसे थीम आधारित उद्यान विकसित किए गए, जिन्होंने शहर की पहचान को नई दिशा दी।

हरित राजस्थान विजन की ओर बड़ा कदम

राजस्थान सरकार का मानना है कि विकसित वृक्षों का रोपण, पार्कों का बेहतर रख-रखाव और नागरिक सहभागिता से प्रदेश के शहर अधिक स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनेंगे। आगामी वर्षा ऋतु में शुरू होने वाला यह अभियान हरित राजस्थान विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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