जमीन अधिग्रहण के बदले अब नकद नहीं, TDR सर्टिफिकेट देने की तैयारी में भजनलाल सरकार

Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Jul, 2026 03:22 PM

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जयपुर। राजस्थान में मास्टर प्लान के तहत बनने वाली सड़कों, पार्कों, ग्रीन एरिया और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भजनलाल सरकार नगरीय विकास विभाग के माध्यम से नई ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट...

जयपुर। राजस्थान में मास्टर प्लान के तहत बनने वाली सड़कों, पार्कों, ग्रीन एरिया और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भजनलाल सरकार नगरीय विकास विभाग के माध्यम से नई ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) नीति लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भविष्य में सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले कई मामलों में नकद मुआवजे के स्थान पर जमीन मालिकों को डिजिटल टीडीआर सर्टिफिकेट दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है।

 

सरकार का मानना है कि इस नीति से भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद कम होंगे, परियोजनाओं में तेजी आएगी और सरकारी खजाने पर एकमुश्त मुआवजे का वित्तीय दबाव भी घटेगा। नगरीय विकास विभाग फिलहाल नीति के अंतिम प्रारूप पर काम कर रहा है, जिसे जल्द कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।

 

टीडीआर यानी ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स ऐसी व्यवस्था है, जिसमें जमीन अधिग्रहित होने पर मालिक को भूमि के मूल्य के अनुरूप विकास अधिकार प्रदान किए जाते हैं। ये अधिकार डिजिटल सर्टिफिकेट के रूप में जारी किए जाएंगे। इस सर्टिफिकेट का उपयोग जमीन मालिक भविष्य में अपनी किसी अन्य भूमि पर अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र (एफएआर) प्राप्त करने के लिए कर सकता है। यदि वह स्वयं इसका उपयोग नहीं करना चाहता, तो इसे किसी बिल्डर या डेवलपर को बेचकर आर्थिक लाभ भी ले सकता है।

 

राज्य सरकार का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार मुआवजे को लेकर विवाद, बजट की कमी और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण सड़क, पार्क और अन्य सार्वजनिक परियोजनाएं वर्षों तक अटक जाती हैं। नई नीति से इन समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इससे नगर विकास प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों को भी मास्टर प्लान के तहत विकास कार्यों को समय पर पूरा करने में सुविधा मिल सकती है।

 

राजस्थान में इससे पहले वर्ष 2012 में भी टीडीआर नीति बनाई गई थी, लेकिन जटिल प्रक्रियाओं और सीमित क्रियान्वयन के कारण यह प्रभावी नहीं हो सकी। अब सरकार महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों की सफल टीडीआर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर नई नीति तैयार कर रही है। प्रस्तावित मॉडल को अधिक पारदर्शी, ऑनलाइन और सिंगल-विंडो प्रणाली पर आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

 

रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने भी लंबे समय से प्रभावी टीडीआर नीति लागू करने की मांग की है। उनका मानना है कि इससे बिल्डरों को अतिरिक्त एफएआर प्राप्त करने का वैधानिक विकल्प मिलेगा, जबकि भूमि मालिकों को अपनी संपत्ति का बेहतर आर्थिक प्रतिफल मिल सकेगा। हालांकि, नीति का अंतिम स्वरूप कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा और उसके बाद ही इसके लागू होने की प्रक्रिया शुरू होगी।

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