Edited By Anil Jangid, Updated: 15 Apr, 2026 06:25 PM

कोटा: एसीबी कोर्ट ने 14 साल पुराने एक मामले में सरकारी वकील हरि सिंह को 3 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। हरि सिंह पर आरोप था कि उन्होंने दहेज केस में नाम निकलवाने के बदले रिश्वत मांगी थी। यह मामला 2011 में हुआ था, और 14 साल...
कोटा: एसीबी कोर्ट ने 14 साल पुराने एक मामले में सरकारी वकील हरि सिंह को 3 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। हरि सिंह पर आरोप था कि उन्होंने दहेज केस में नाम निकलवाने के बदले रिश्वत मांगी थी। यह मामला 2011 में हुआ था, और 14 साल बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
हरि सिंह, जो भरतपुर के अतरामपुरा गांव के निवासी हैं, पर आरोप था कि उन्होंने पुलिस के नाम से दहेज केस में नाम निकलवाने के लिए 5 हजार रुपये रिश्वत मांगी। यह मामला 16 नवंबर 2011 को तब सामने आया जब ओम प्रकाश वैष्णव (निवासी सांगोद, कोटा) ने एसीबी चौकी कोटा में शिकायत दर्ज कराई थी।
परिवादी के अनुसार, उनकी भाभी ने दहेज की शिकायत पर उनके बड़े भाई और माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया था। पुलिस ने उनके भाई को गिरफ्तार कर लिया और माता-पिता को थाने में बिठा लिया। इस दौरान थानेदार और सिपाही ने उन्हें छोड़ने के बदले 15 हजार रुपये की मांग की, और जमानत के समय 2 हजार रुपये अतिरिक्त वसूले।
लेकिन घटना यहीं नहीं रुकी। 15 नवंबर 2011 को परिवादी के पिता के मोबाइल पर सरकारी वकील हरि सिंह का फोन आया। उन्होंने कहा, “पुलिस ने आपको और आपकी पत्नी को गलत मुलजिम बनाया है, मैं थानेदार को कुछ रुपये देकर तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का नाम केस से निकाल दूंगा।” हरि सिंह ने इस काम के बदले 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
एसीबी ने इस मामले की जांच की और पुष्टि की कि हरि सिंह ने केस में नाम निकलवाने के लिए रिश्वत की मांग की थी। इसके बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई, लेकिन रिश्वत की रकम परिवादी ने नहीं दी, जिससे ट्रैप सफल नहीं हो सका।
इस मामले में एसीबी की टीम ने बिना नंबर की प्रथम सूचना रिपोर्ट तैयार की और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जयपुर मुख्यालय को भेजी। 12 जुलाई 2012 को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और जांच के बाद उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में 19 गवाह और 30 से ज्यादा दस्तावेज पेश किए गए, जिसके बाद अदालत ने हरि सिंह को 3 साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।