पुलिसकर्मियों ने डॉक्टर से हड़पे लाखों रुपए, किशोरी को भगाकर ले गया था युवक, फिर जबरन करवाया गर्भपात

Edited By Anil Jangid, Updated: 08 Apr, 2026 07:10 PM

police officers extort lakhs from doctor in minor abortion case

कोटा: कोटा ग्रामीण जिले के एक थाना क्षेत्र में एक गंभीर और चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें पुलिसकर्मियों ने नाबालिग के गर्भपात से जुड़े मामले में डॉक्टर से लाखों रुपए की वसूली की। यह मामला डेढ़ साल पुराना है, जब एक युवक ने एक किशोरी को...

कोटा: कोटा ग्रामीण जिले के एक थाना क्षेत्र में एक गंभीर और चौंकाने वाले मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें पुलिसकर्मियों ने नाबालिग के गर्भपात से जुड़े मामले में डॉक्टर से लाखों रुपए की वसूली की। यह मामला डेढ़ साल पुराना है, जब एक युवक ने एक किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाकर ले गया था। पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार किया। किशोरी के बयान में जबरन गर्भपात कराए जाने का खुलासा हुआ, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी।

 

जांच में यह बात सामने आई कि मध्यप्रदेश के सीहोर स्थित मां नर्मदा अस्पताल में गर्भपात कराया गया था। पुलिस ने अस्पताल में जांच की तो रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई। अस्पताल संचालक ने किशोरी के नाम और उम्र में हेरफेर करके दस्तावेज तैयार किए थे। इसके बाद पुलिस ने अस्पताल संचालक और एक अन्य डॉक्टर के खिलाफ अवैध गर्भपात का मामला दर्ज किया, और संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि अन्य डॉक्टर फरार हो गया।

 

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। 2 मार्च को पुलिसकर्मी डॉक्टर को पूछताछ के लिए थाने बुलाकर 8 लाख रुपए की मांग करने लगे। कांस्टेबल महावीर कुमार ने डॉक्टर को धमकाते हुए कहा कि पैसे नहीं देने पर उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा और उसे जेल भेज दिया जाएगा। डर के कारण डॉक्टर ने 7 लाख रुपए देने की सहमति जताई और अपने परिचितों से पैसे जुटाए। 8 मार्च को डॉक्टर ने यह राशि पुलिसकर्मी को एक होटल में दी, और इसके बाद ही उसे जाने दिया गया।

 

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए, सीआइ सुरेंद्र सिंह बिश्नोई और कांस्टेबल महावीर कुमार को 26 मार्च को लाइन हाजिर कर दिया गया था। जांच में इन पुलिसकर्मियों द्वारा डॉक्टर से पैसे की वसूली की पुष्टि हुई है, और रिपोर्ट अब जयपुर पीएचक्यू भेज दी गई है। डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया और किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं की, जो कि गंभीर अपराध था।

 

यह मामला पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार और कर्तव्यहीनता का उदाहरण पेश करता है, और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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