Edited By Anil Jangid, Updated: 11 Apr, 2026 04:29 PM

कोटा। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने कोटा प्रवास के दौरान सनातन धर्म और समाज में बढ़ते दिखावे व पाखंड पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में सनातन धर्म के नाम पर केवल प्रदर्शन और आडंबर बढ़ रहा है, जबकि...
कोटा। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने कोटा प्रवास के दौरान सनातन धर्म और समाज में बढ़ते दिखावे व पाखंड पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में सनातन धर्म के नाम पर केवल प्रदर्शन और आडंबर बढ़ रहा है, जबकि वास्तविक धार्मिक आचरण और अनुशासन में कमी देखने को मिल रही है।
शंकराचार्य ने कहा कि बहुत से लोग धर्म का पालन करना ही नहीं चाहते, जिसके कारण सनातन परंपरा के कमजोर होने का खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी स्थिति को देखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है कि “नकली हिंदुत्व” को पीछे किया जाए और वास्तविक धार्मिक मूल्यों को आगे लाया जाए।
अपने बयानों को लेकर उठ रहे विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पाखंड में लिप्त हैं, उन्हें उनकी बातें पसंद नहीं आतीं। ऐसे लोग चाहते हैं कि वे जो कर रहे हैं, उसे कोई न रोके और वह उसी तरह जारी रहे, जबकि समाज में सुधार और जागरूकता आवश्यक है।
मंदिरों में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मंदिर सभी भक्तों के लिए समानता का स्थान होते हैं। उनका उद्देश्य होता है कि हर व्यक्ति अपने आराध्य के करीब जा सके। उन्होंने कहा कि संसार में भले ही कई जगह भेदभाव हो, लेकिन मंदिर ही एक ऐसा स्थान था जहां सभी समान माने जाते थे। लेकिन अब वहां भी वीआईपी दर्शन जैसी व्यवस्थाएं शुरू हो गई हैं, जो उनके अनुसार अन्याय के समान है।
चुनाव और मतदान को लेकर उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में हर कार्य को धर्म के दृष्टिकोण से देखा जाता है। मतदान भी एक जिम्मेदारी है, जिसमें यह विचार करना चाहिए कि किसे वोट देने से पुण्य या पाप का परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे उम्मीदवार या पार्टी को वोट देता है जो गौ हत्या को बढ़ावा देती है, तो उसका परिणाम मतदाता को भी भोगना पड़ सकता है।
उन्होंने हिंदू समाज से अपील की कि मतदान करते समय धार्मिक मूल्यों और गौ संरक्षण जैसे विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि अनजाने में किसी पाप के भागी न बनें।
शंकराचार्य के इन बयानों के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।