Edited By Anil Jangid, Updated: 11 Jun, 2026 05:18 PM

जयपुर। राजधानी जयपुर के हीराबाला इंडस्ट्रियल एरिया, कनौटा में स्थित जयपुर बायो फर्टिलाइजर्स इकाई पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की अचानक कार्रवाई के दौरान जैविक उर्वरक निर्माण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। निरीक्षण के दौरान मिले तथ्यों ने...
जयपुर। राजधानी जयपुर के हीराबाला इंडस्ट्रियल एरिया, कनौटा में स्थित जयपुर बायो फर्टिलाइजर्स इकाई पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की अचानक कार्रवाई के दौरान जैविक उर्वरक निर्माण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। निरीक्षण के दौरान मिले तथ्यों ने न केवल इकाई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि किसानों को मिलने वाले उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
निरीक्षण में पाया गया कि जैविक उर्वरक का निर्माण निर्धारित मानकों के विपरीत लगभग 45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर किया जा रहा था, जबकि वैज्ञानिक मानकों के अनुसार जैविक उर्वरक निर्माण के लिए लगभग 20 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक तापमान पर सूक्ष्मजीवों की सक्रियता प्रभावित होती है, जिससे जैविक उर्वरक की गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आ सकती है।
इसके अलावा इकाई में पैकेजिंग और लेबलिंग में भी कई भ्रामक जानकारियां पाई गईं। कुछ उत्पादों पर उनकी वैधता अवधि 24 महीने तक दर्शाई गई थी, जबकि जैविक उर्वरक की सामान्य वैधता अवधि लगभग 6 महीने होती है। यह न केवल उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला है, बल्कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की धारा 19 का स्पष्ट उल्लंघन भी माना जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कच्चे माल का भंडारण और रख-रखाव व्यवस्थित नहीं था। कई स्थानों पर रॉ मटेरियल बिना किसी पहचान लेबल के रखा हुआ पाया गया, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल उठे हैं। इसके साथ ही उर्वरकों का भंडारण भी निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं किया जा रहा था, जिससे अवैध और अनियमित भंडारण की स्थिति स्पष्ट हुई।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के निर्देश पर मौके से नमूने एकत्र किए गए हैं और उनकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई राज्य में कृषि इनपुट की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।