बस बनी नहीं, रजिस्ट्रेशन पहले हो गया: जयपुर RTO ने पकड़ा MP परिवहन विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा

Edited By Anil Jangid, Updated: 11 Jun, 2026 03:07 PM

jaipur rto exposes major mp transport department irregularity

जयपुर। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग से जुड़े एक बड़े कथित फर्जीवाड़े का खुलासा जयपुर आरटीओ की कार्रवाई में हुआ है। आमेर रोड स्थित एक बस बॉडी निर्माण कारखाने पर छापेमारी के दौरान परिवहन विभाग की टीम ने पाया कि जिन बसों की बॉडी निर्माण प्रक्रिया अभी पूरी...

जयपुर। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग से जुड़े एक बड़े कथित फर्जीवाड़े का खुलासा जयपुर आरटीओ की कार्रवाई में हुआ है। आमेर रोड स्थित एक बस बॉडी निर्माण कारखाने पर छापेमारी के दौरान परिवहन विभाग की टीम ने पाया कि जिन बसों की बॉडी निर्माण प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई थी, उनका पंजीकरण पहले ही बस के रूप में कर दिया गया था। इस मामले ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

प्रादेशिक परिवहन अधिकारी राजेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि आमेर क्षेत्र में एक कारखाने में नियमों के विपरीत बस बॉडी निर्माण का कार्य किया जा रहा है। सूचना के आधार पर जिला परिवहन अधिकारी नाथू सिंह के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान दो बसें निर्माणाधीन अवस्था में मिलीं, जिनकी बॉडी का काम अभी पूरा नहीं हुआ था।

 

हैरानी की बात यह रही कि दस्तावेजों की जांच में पता चला कि दोनों वाहनों का करीब 15 दिन पहले ही बस के रूप में पंजीकरण किया जा चुका था। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार पहले चेसिस खरीदी जाती है, उसके बाद बॉडी निर्माण, तकनीकी परीक्षण और निरीक्षण पूरा होने पर वाहन का अंतिम पंजीकरण किया जाता है। लेकिन इस मामले में निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही रजिस्ट्रेशन जारी कर दिया गया।

 

आरटीओ टीम ने मौके से दोनों निर्माणाधीन बसों को जब्त कर लिया और कारखाने को सील कर दिया। जांच में सामने आया कि कारखाना संचालक मुबिर खान कई वर्षों से बस बॉडी निर्माण का कार्य कर रहा है, लेकिन उसके पास आवश्यक ट्रेड सर्टिफिकेट नहीं था। यह भी पाया गया कि जब्त की गई दोनों बसों के पंजीकरण नंबर MP 44 ZG 9665 और MP 44 ZG 9465 हैं, जिनका पंजीकरण मध्य प्रदेश के नीमच स्थित परिवहन कार्यालय द्वारा किया गया था।

 

आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कम से कम तीन पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कारखाना संचालक, दोनों बसों के मालिकों तथा नीमच परिवहन विभाग के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही दोनों वाहनों की आरसी रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

 

परिवहन विभाग का मानना है कि बिना भौतिक निरीक्षण और नियमों का पालन किए वाहन का पंजीकरण करना गंभीर अनियमितता है। अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!