नकली बीज घूसकांड पर घमासान: ACB पहुंचे किरोड़ी लाल मीणा, बोले- दोषी हूं तो गिरफ्तार करो

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 19 Jun, 2026 07:48 PM

kirodi lal meena reaches acb says  arrest me if i am guilty

राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ.किरोड़ीलाल मीणा एसीबी मुख्यालय पहुंचे और साफ कहा- “अगर मेरे खिलाफ आरोप सही हैं तो मुझे गिरफ्तार कर लें।”

जयपुर | आज राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ.किरोड़ीलाल मीणा एसीबी मुख्यालय पहुंचे और साफ कहा- “अगर मेरे खिलाफ आरोप सही हैं तो मुझे गिरफ्तार कर लें।” यह बयान नकली बीज घूसकांड, करौली की नानपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा के 26 करोड़ के कथित घोटाले और आरएसडब्ल्यूसी में अरबों के घोटाले को लेकर चल रहे विवाद का नया मोड़ है। पूरा मामला भ्रष्टाचार, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और संस्थागत विश्वसनीयता के बीच उलझा हुआ है।

मुख्य मुद्दे

1. नकली बीज घूस कांड
8 जून 2026 को एसीबी ने राजस्थान राज्य बीज निगम से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज की। पूर्व निदेशक जुगल किशोर विश्नोई सहित छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई और ढाई करोड़ से अधिक नकदी बरामद हुई। एफआईआर में “डॉक्टर” और “मंत्री” का जिक्र था। 9 जून को एफआईआर लीक हो गई और 10 जून को मीडिया में छपी। कांग्रेस नेताओं ने मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर विभाग में वसूली और मिलीभगत का आरोप लगाया। इस्तीफे और उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई।

2. नानपुर मनरेगा घोटाला
करौली जिले की ग्राम पंचायत नानपुर में पिछली सरकार के समय ₹28 करोड़ के कार्य स्वीकृत हुए। जांच में ₹26 करोड़ के कथित घोटाले का पता चला। 8 मई 2026 को कमिश्नर नरेगा ने एसीबी को एफआईआर दर्ज करने का पत्र लिखा, लेकिन आज तक यह नहीं हुई।

3. आरएसडब्ल्यूसी घोटाला
2024 से आरएसडब्ल्यूसी में कल्पतरू समूह की कंपनी के माध्यम से अरबों के घोटाले के मामले में एसीबी को कई पत्र लिखे गए, लेकिन जांच धीमी रही। 

मंत्री का पक्ष
डॉ.किरोड़ी लाल मीणा ने 10 जून को एसीबी महानिदेशक को पत्र लिखा। उन्होंने एफआईआर लीक होने पर एसीबी पर दबाव में षड्यंत्र का आरोप लगाया। कहा कि वे खुद डॉक्टर और मंत्री दोनों हैं, इसलिए उनके खिलाफ गलत धारणा बन रही है। उन्होंने विपक्ष से सबूत मांगे और कहा कि अगर संलिप्तता साबित हो तो इस्तीफा देने को तैयार हैं। साथ ही पिछली कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों में एसीबी की निष्क्रियता का हवाला दिया। आज एसीबी पहुंचकर उन्होंने फिर से निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। 

विपक्ष का आरोप 
कांग्रेस का कहना है कि कृषि विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार चल रहा था। छापेमारी के नाम पर वसूली हो रही थी और मंत्री की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच और मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। 

विश्लेषण
यह मामला दो तरफा है। एक तरफ मंत्री किरोड़ीलाल मीणा नकली बीज के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई कर रहे थे, जिससे किसानों को फायदा हो रहा था। दूसरी तरफ उनके विभाग में घूसकांड के आरोप लगे हैं। एसीबी पर लीक और चयनात्मक कार्रवाई के आरोप भी गंभीर हैं। मंत्री का खुद एसीबी पहुंचकर अल्टीमेटम देना साहसिक कदम दिखता है, लेकिन इससे सवाल भी उठते हैं कि क्या यह राजनीतिक दबाव है या वाकई पारदर्शिता की मांग। किसानों के लिए नकली बीज का मुद्दा सीधा livelihood से जुड़ा है। यदि विभाग के स्तर पर गड़बड़ी हुई, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। 

निष्कर्ष 
पूरी घटना राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और एसीबी जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल खड़े करती है। एसीबी को निष्पक्ष और तेज जांच करनी चाहिए। नानपुर और आरएसडब्ल्यूसी मामलों में भी ठोस कार्रवाई जरूरी है। सरकार और विपक्ष दोनों को संयम बरतना चाहिए। आरोप लगाना आसान है, लेकिन सबूतों के आधार पर कार्रवाई करना लोकतंत्र की असली परीक्षा है। जनता को सच्चाई और न्याय की उम्मीद है, न कि सियासी नाटक की।

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