Edited By Anil Jangid, Updated: 12 Jun, 2026 04:12 PM

जयपुर। भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। देश के दिग्गज निशानेबाज और प्रसिद्ध कोच Jaspal Rana का असमय निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से लौटते समय फ्लाइट में उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा।
जयपुर। भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। देश के दिग्गज निशानेबाज और प्रसिद्ध कोच Jaspal Rana का असमय निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप से लौटते समय फ्लाइट में उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। मात्र 49 वर्ष की उम्र में उनके निधन से भारतीय शूटिंग जगत में शोक की लहर है।
जसपाल राणा न सिर्फ एक महान खिलाड़ी थे, बल्कि वे भारतीय निशानेबाजी के प्रमुख कोचों में से एक भी थे। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर जैसी खिलाड़ी भी शामिल हैं। उनकी कोचिंग शैली तकनीकी मजबूती और मानसिक दृढ़ता पर आधारित मानी जाती थी।
राजस्थान के शूटिंग जगत में भी जसपाल राणा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका राज्य से गहरा जुड़ाव रहा और वे लंबे समय तक राजस्थान के उभरते निशानेबाजों के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते रहे। जयपुर स्थित जगतपुरा शूटिंग रेंज के विकास और तकनीकी सुधारों में भी उनका योगदान माना जाता है। उन्होंने कई बार जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं और चयन ट्रायल्स में भाग लिया और खिलाड़ियों को बारीक प्रशिक्षण दिया।
राजस्थान के खेल हलकों में उनका नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता था। यहां के कई निशानेबाजों ने उन्हें अपना गुरु और प्रेरणा स्रोत बताया है। उन्होंने राजस्थान राइफल एसोसिएशन के साथ मिलकर कई तकनीकी सुधारों पर सुझाव दिए, जिससे राज्य की शूटिंग सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की ओर बढ़ीं।
उनके संबंध ओलंपिक पदक विजेता कर्नल Rajyavardhan Singh Rathore से भी बेहद करीबी और सम्मानजनक रहे। दोनों ने मिलकर भारत में शूटिंग खेल के विकास और ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रशासकों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका योगदान हमेशा भारतीय शूटिंग इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।