50 साल में 5 गुना फैल गया Jaipur, बुनियादी सुविधाओं में इतना पिछड़ा शहर

Edited By Anil Jangid, Updated: 12 Jul, 2026 02:58 PM

jaipur expanded fivefold in 50 years basic infrastructure lags behind

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर कभी परकोटे तक सीमित था, लेकिन समय के साथ पिछले पांच दशक में यह शहर पांच गुना फैल गया। वहीं, आबादी भी 6.15 लाख बढ़कर 48 लाख तक हो चुकी है। शहर के दायरे की बात करें तो वो 10 किलोमीटर से बढ़कर 50 किलोमीटर हो गया है।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर कभी परकोटे तक सीमित था, लेकिन समय के साथ पिछले पांच दशक में यह शहर पांच गुना फैल गया। वहीं, आबादी भी 6.15 लाख बढ़कर 48 लाख तक हो चुकी है। शहर के दायरे की बात करें तो वो 10 किलोमीटर से बढ़कर 50 किलोमीटर हो गया है। हालांकि, पिछले ढाई दशक में शहर तो भीड़ से भर गया, लेकिन नए उपनगर सुविधाओं संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। यहां पर स्वास्थ्य, शिक्षा, उच्च शिक्षा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सीवरेज, पेयजल, बिजली जैसी सुविधाएं यथावत होने के साथ ही पूरे शहर में पेयजल की सरकारी सुविधा नहीं है। बात करें मानसरोवर, मुहाना, जगतपुरा, वैशाली नगर, सिरसी रोड और विद्याधर नगर तेजी से विकसित हुए नए इलाकों की तो यहां पर आबादी की गति के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका। ऐसे में राजधानी आज बढ़ते दबाव, सार्वजनिक परिवहन की कमी और सीबर-ड्रेनेज जैसी समस्याओं से जूझ रही है।

 

जयपुर शहर में बढ़ती आबादी के साथ हर साल नए बिजली और पानी के कनेक्शन जुड़ रहे हैं, हजारों नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं लेकिन सड़कों का चौड़ीकरण, जल स्रोतों का विस्तार, सरकारी अस्पताल, सार्वजनिक परिवहन और पार्किंग जैसी सुविधाएं उसी रफ्तार से नहीं बढ़ीं। आज भी शहर पेयजल व्यवस्था को लेकर बीसलपुर बांध पर निर्भर है। हर साल गर्मी में नए क्षेत्रों में पानी की मांग बढ़ने के साथ जल संकट गहराता है। नए साथ ही ग्रिड सब-स्टेशन बनने की रफ्तार धीमी है, जिससे कई इलाकों में लो-वोल्टेज की समस्या ज्यों की त्यों है। पीआरएन, खो नागोरियान और आगरा रोड क्षेत्र की कॉलोनियां इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं।

 

स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो संपूर्ण सुविधा युक्त एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध 9 अस्पताल पुराने शहर के दायरे में ही है जिन पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। वहीं, बात करें तो पार्क और खेल मैदानों की तो नगर निगम का क्षेत्रफल करीब 780 वर्ग किलोमीटर और जेडीए का क्षेत्र लगभग 6000 वर्ग किलोमीटर है। पार्कों की संख्या बढ़ी है, लेकिन बच्चों और युवाओं के लिए खेल मैदान कम हैं। सार्वजनिक परिवहन की बात करें तो 1200 सिटी बसों की जरूरत वाले शहर में सिर्फ 200 बसों से काम चलाया जा रहा है। मेट्रो का दायरा भी अभी शहर के सीमित हिस्से तक ही है। जबकि, जयपुर का जनसंख्या घनत्व 6 हजार 400 प्रतिवर्ग किलोमीटर है। साथ ही जयपुर की रफ्तार की तस्वीर देखें तो यहां पर सरकारी अस्पतालों में 6 हजार 579 बेड है। स्वच्छता रैंकिंग के मामले में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जयपुर नगर निगम हैरिटेज की 20वीं तो नगर निगम ग्रेटर की 16 रैंक हैं। तो थी जयपुर शहर की वो तस्वीर जो अभी पूरी होनी बाकी है।

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