सरकारी भर्तियों में बड़ा फर्जीवाड़ा! बैकडेट डिग्री से मिली नौकरियां रद्द

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 16 Feb, 2026 08:14 PM

big fraud in government recruitments

राजस्थान में सरकारी भर्तियों को लेकर फर्जी डिग्री, जाली अंकतालिका और डमी अभ्यर्थियों का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है।

जयपुर । राजस्थान में सरकारी भर्तियों को लेकर फर्जी डिग्री, जाली अंकतालिका और डमी अभ्यर्थियों का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि कोरोना काल के बाद निकली विभिन्न भर्तियों में बैकडेट डिग्री, फर्जी खेल प्रमाण पत्र, नकली दिव्यांग प्रमाण पत्र और यहां तक कि तलाक के जाली दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की गई। शिक्षक, पीटीआई, फायरमैन, मेडिकल, रेलवे और कांस्टेबल भर्ती तक इस फर्जीवाड़े की पहुंच पाई गई है। विशेष अभियान समूह की जांच में दर्जनों विश्वविद्यालयों, सैकड़ों अभ्यर्थियों और कई लोकसेवकों की भूमिका सामने आई है। खुलासे के बाद भी बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियां अभी तक औपचारिक रूप से वापस नहीं ली गई हैं और सभी जाली दस्तावेजों की जब्ती की प्रक्रिया जारी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कोरोना अवधि में बंद रहे कई विश्वविद्यालयों ने उसी समयावधि में फर्जी डिग्रियां तैयार कीं। जैसे ही भर्तियों की घोषणा हुई, अभ्यर्थियों ने बैकडेट में डिप्लोमा, डिग्री और आरक्षण श्रेणी से जुड़े प्रमाण पत्र बनवाए। इस मामले में ओपीजेएस विश्वविद्यालय चूरू का नाम प्रमुख रूप से सामने आया। राज्य सरकार ने गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने पर बीकानेर संभागीय आयुक्त को विश्वविद्यालय का प्रशासक नियुक्त किया और सभी पाठ्यक्रमों में नए प्रवेश पर रोक लगा दी।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 में बीपीएड की फर्जी डिग्रियों का बड़ा मामला सामने आया। आरोप है कि उत्तर प्रदेश की जेएस यूनिवर्सिटी ने बैकडेट में डिग्रियां जारी कीं। करीब 200 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। इस मामले में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और संचालक को गिरफ्तार किया गया, जबकि संबंधित राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द कर दी। करीब 1200 अभ्यर्थियों को जांच के दायरे में लिया गया, जिनमें से 321 अभ्यर्थियों की डिग्री संदिग्ध पाई गई। शेष दस्तावेजों की जांच जारी है। फर्जीवाड़े के आधार पर नौकरी पाने वाले 134 शारीरिक शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। चयन बोर्ड ने 248 अभ्यर्थियों की सूची शिक्षा विभाग को भेजी थी, जिनकी नियुक्तियां बाद में निरस्त कर दी गईं। विभाग दोषियों से वेतन की वसूली भी करेगा।

फर्जी खेल प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षक, पीटीआई, फायरमैन और अन्य भर्तियों में आरक्षण का लाभ लेने के मामले भी सामने आए हैं। कई अभ्यर्थियों को जांच के बाद डिबार किया गया। दिव्यांग श्रेणी में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। पशुपरिचर भर्ती में 600 से अधिक अभ्यर्थियों का दोबारा चिकित्सीय परीक्षण कराया जा रहा है, जबकि आरएएस-2023 साक्षात्कार में भी फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के मामले पकड़े गए हैं।

ज़्यादा जानें
तलाकशुदा कोटे का लाभ लेने के लिए फर्जी तलाक प्रमाण पत्र लगाने के दो दर्जन से अधिक मामले भी सामने आए हैं। विशेष अभियान समूह को लगभग एक हजार शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 250 मामलों में प्राथमिक जांच में फर्जी अंकतालिका के आधार पर नौकरी पाने की आशंका पाई गई है। कुछ प्रकरणों में आरोप पत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

तथ्य संक्षेप
डमी, पेपर लीक, फर्जी डिग्री व अन्य अनियमितताओं के कुल दर्ज प्रकरण: 144

फर्जी डिग्री और खेल प्रमाण पत्र से जुड़े प्रकरण: 39

पेपर लीक प्रकरण: 8

कुल गिरफ्तारियां: 428

सेवा समाप्त लोकसेवक: 170

सत्यापन के बाद निरस्त नियुक्तियां: 135

दिव्यांगता परिवाद में अयोग्य पाए गए कार्मिक: 37

16 दिसंबर 2023 के बाद विशेष अभियान समूह में कई नए प्रकरण दर्ज

जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी और भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रणालीगत सुधार किए जाएंगे।

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