राज्यसभा में सांसद डॉ. अनिल बॉन्डे ने टाइप-1 डायबिटीज़ पर केन्द्र सरकार से ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग की

Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Feb, 2026 03:23 PM

rs mp dr anil bonde urges for strong policy measures on type 1 diabetes in chil

नई दिल्ली | गुजरात की दो डॉक्टर बहनों डॉ स्मिता जोशी और डॉ.शुक्लाबेन रावल की भारत में बच्चों में बढ़ते डायबिटीज (टाइप-1 डायबिटीज़ ) के मामलों को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार से विशेष स्वास्थ्य नीति बनाने की मुहिम अब सिरे पर चढ़ने लगी है और यह...

जयपुर। गुजरात की दो डॉक्टर बहनों डॉ. स्मिता जोशी और डॉ. शुक्लाबेन रावल की भारत में बच्चों में बढ़ते डायबिटीज (टाइप-1 डायबिटीज़ ) के मामलों  को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार से विशेष  स्वास्थ्य नीति बनाने की मुहिम अब सिरे पर चढ़ने लगी है और यह मामला अब संसद में भी गूँजा है । वर्तमान में गुजरात और राजस्थान दो ही ऐसे प्रदेश ने जहां इन डॉक्टर बहनों के प्रयासों से सभी सरकारी चिकित्सालयों में टाइप-1 डायबिटीज़  के निदान के प्रबन्ध किए जाने की घोषणा की गई है।

 

इसी कड़ी में ये दोनों बहनें बच्चों में बढ़ते डायबिटीज के प्रति जागरूकता पैदा करने और इसके निदान के लिए नीति निर्धारण का आग्रह करने पुनः भारत की यात्रा पर है। पूर्व में भी वे टाइप-1 डायबिटीज़  के लिए अपने जागरूकता अभियान के तहत कश्मीर से कन्या कुमारी और अमरीका में ईस्ट कोस्ट से वेस्ट कॉस्ट तक सात हजार किमी की यात्रा कर चुकी हैं । इन दिनों  वे दक्षिणी भारत के आंध्र प्रदेश दौरे पर है। इससे पहले इन दोनों डॉक्टर बहनों  ने असम और ओडिशा राज्य का दौरा कर वहाँ वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों से भेंट करने के बाद आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्या कुमार यादव से मुलाकात करके उनको आंध्र प्रदेश के टाइप -1 डायबिटीज बच्चों के लिए पीआईपी के अन्तर्गत भारत सरकार को प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया । आगामी 16-17 मार्च को वे राजस्थान दौरे पर भी आयेंगी ।

 

डॉ. स्मिता शुक्ता ने बताया कि वर्तमान में  सभी राज्यो में नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन प्लान (पीआईपी ) की मीटिंग्स चल रही है । इसमें हर राज्य किसी भी इनोवेटिव हेल्थ प्रोग्राम के लिए केन्द्र सरकार से फण्ड के लिए दरखास्त करते है । हमारा प्रयास है कि डायबिटीज पीड़ित बच्चों के लिए पीआईपी के तहत फण्ड के लिए ज़्यादा से ज़्यादा राज्यो को केन्द्र सरकार से  फण्ड लेने का आग्रह करने के लिए प्रेरित करना ताकि डायबिटीज पीड़ित बच्चों  को चिकित्सा सुविधा मिल सकें ।

 

संसद में उठा मामला
इस बीच भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बॉन्डे (महाराष्ट्र) ने  संसद के उच्च सदन में टाइप-1 डायबिटीज़  से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों को मजबूती से उठाया और केंद्र सरकार से इस दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाने की मांग की।

 

सदन में विषय उठाते हुए डॉ. अनिल बॉन्डे ने कहा,“टाइप-1 डायबिटीज़ एक ऑटोइम्यून और जीवन-पर्यंत उपचार की आवश्यकता वाली बीमारी है, जो विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को प्रभावित कर रही है। इस बीमारी के मरीजों को जीवन भर इंसुलिन, नियमित जांच और सतत चिकित्सीय देखभाल की आवश्यकता होती है।”
उन्होंने आगे कहा,“देश के कई हिस्सों में आज भी टाइप-1 डायबिटीज़ को लेकर पर्याप्त जागरूकता और समय पर निदान की कमी है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिवारों को गंभीर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”

 

डॉ. बॉन्डे ने सरकार से आग्रह किया कि“टाइप-1 डायबिटीज़ को एक गंभीर राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौती के रूप में मान्यता दी जाए और इसके लिए विशेष कार्यक्रम, सस्ती इंसुलिन की उपलब्धता, आधुनिक जांच सुविधाएं तथा विशेषज्ञ उपचार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत सुनिश्चित किया जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि,“ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों तक उपचार और दवाइयों की समान पहुंच सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है, ताकि कोई भी बच्चा या युवा केवल संसाधनों के अभाव में पीड़ित न रहे।” सांसद डॉ. बॉन्डे के अनुसार, यदि समय रहते समन्वित नीति, जागरूकता अभियान और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो टाइप-1 डायबिटीज़ से प्रभावित लाखों परिवारों को राहत दी जा सकती है और देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा सकता है।

 

डॉ. बोन्डे ने कहा कि टाइप-1 डायबिटीज़ एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता, जिससे जीवन-भर इंसुलिन और चिकित्सीय निगरानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि आज टाइप-1 डायबिटीज़ अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत सहित दुनिया भर में टाइप-1 डायबिटीज़ का बोझ चिंता का विषय है। इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन के अनुसार दुनिया भर में 12.11 लाख से अधिक बच्चे और किशोर टाइप-1 डायबिटीज़ से पीड़ित हैं, जिसमें भारत का हिस्सा अत्यधिक है, तथा हर दिन लगभग 65 बच्चे या किशोर नई इस बीमारी का शिकार बन रहे हैं।  

 

सांसद बोन्डे ने कहा कि कई ऐसे परिवार हैं जिन्हें टाइप-1 डायबिटीज़ के इलाज के लिए सस्ती इंसुलिन, ब्लड-शुगर मॉनिटरिंग डिवाइसेज़ और विशेषज्ञ की देखभाल तक नियमित पहुँच नहीं मिल पा रही है, खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इस बीमारी को प्राथमिकता दी जाए, ताकि रोग की समय पर पहचान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

 

संसद में डॉ. बोन्डे के इस गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे को उठाने के बाद कई सांसदों ने इसका समर्थन किया और भारत सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता, उपचार सुविधाओं तथा नीति-गत कदम उठाने का आग्रह किया।

 

विशेषज्ञों ने भी माना है कि भारत जैसे देश में मधुमेह के मामलों और टाइप-1 डायबिटीज़ की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियानों, नियमित स्क्रीनिंग और स्कूल-आधारित स्वास्थ्य जांचों का विस्तार करना जरूरी है, जिससे बीमारी के बावजूद प्रभावित लोगों की जीवन-गुणवत्ता बेहतर हो सके।  

 

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में कुल मिलाकर मधुमेह से ग्रस्त लोगों की संख्या लगभग 11.4 प्रतिशत आबादी तक पहुंच चुकी है, जबकि 15.3 प्रतिशत लोग प्री-डायबिटीज़ की स्थिति में हैं, जो भविष्य में डायबिटीज़ के मरीज बन सकते हैं।  टाइप-1 डायबिटीज़ का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी जटिलताएँ जैसे आंखों, किडनी तथा हृदय संबंधी समस्याएँ भी मरीजों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक स्वास्थ्य शिक्षा तथा सरल उपलब्ध उपचार इससे जुड़ी जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।  

-नीति गोपेन्द्र भट्ट 

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!