गौ संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर, “राज्य माता” दर्जे पर सकारात्मक विचार : बालमुकुंदाचार्य

Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Feb, 2026 12:50 PM

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जयपुर। Rajasthan की 16वीं विधानसभा का पंचम सत्र जारी है। इस दौरान हवामहल से विधायक बालमुकुंदाचार्य ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार गौ माता की रक्षा, संवर्धन एवं सेवा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध और संवेदनशील...

जयपुर। Rajasthan की 16वीं विधानसभा का पंचम सत्र जारी है। इस दौरान हवामहल से विधायक बालमुकुंदाचार्य ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार गौ माता की रक्षा, संवर्धन एवं सेवा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध और संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार निरंतर ठोस एवं प्रभावी कदम उठा रही है।

 

विधायक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार अन्य राज्यों की तर्ज पर गौ माता को “राज्य माता” का दर्जा प्रदान करने के विषय में सकारात्मक विचार कर रही है। इसके लिए विधिक, प्रशासनिक और सामाजिक पहलुओं का गंभीरता से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि एक सुदृढ़ एवं प्रभावी कानून बनाकर गौ संरक्षण को और अधिक मजबूत किया जा सके।

 

आचार्य ने कहा कि गौ तस्करी और अवैध वध जैसी गतिविधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। दोषियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है और कानून व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

 

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गौशालाओं को दिए जाने वाले अनुदान में वृद्धि की गई है। साथ ही नई गौशालाओं की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को सहयोग, चारे की उपलब्धता तथा पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र में गौ संरक्षण के लिए मजबूत और व्यवस्थित ढांचा विकसित करना है।

 

विधायक ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे गौ सेवा एवं संरक्षण के कार्य में सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि केवल गौशालाओं पर निर्भर रहने के बजाय घर-घर में गौ सेवा की भावना को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सामूहिक प्रयास और जनसहभागिता के माध्यम से ही गौ संरक्षण के संकल्प को पूर्ण किया जा सकता है।

 

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की संवेदनशील नीतियों, कड़े कानूनों और समाज के सहयोग से राज्य की संस्कृति, परंपरा और गौरव की रक्षा का यह प्रयास निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

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