Edited By Anil Jangid, Updated: 30 Nov, 2025 02:45 PM

उत्तर भारत के राज्यों में राजथान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में एक ओर जहां वायु प्रदूषण होने से सांसों पर संकट है, वहीं, अब केंद्रीय भूजल बोर्ड की एक रिपोर्ट ने साफ पानी को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है जिसके बारे में जानकर आप भी...
जयपुर। उत्तर भारत के राज्यों में राजथान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में एक ओर जहां वायु प्रदूषण होने से सांसों पर संकट है, वहीं, अब केंद्रीय भूजल बोर्ड की एक रिपोर्ट ने साफ पानी को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 में कहा गया है कि देशभर से एकत्र किए गए कुल नमूनों में से 13 से 15 प्रतिशत में यूरेनियम संदूषण पाया गया है.
जल शक्ति मंत्रालय के अधीन केंद्रीय भूजल बोर्ड की यह रिपोर्ट 2024 में पूरे भारत से एकत्र किए गए पानी के लगभग 15 हजार नमूनों पर आधारित है. इस रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली में 86 जगहों पर भूजल की जांच की गई, जिनमें से कई जगहों के नमूने पेयजल के लिए भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा तय मानकों से अधिक संदूषित पाए गए.
इससें पता चलता है कि भारत में अधिकांश भूजल पीने लायक हैं, लेकिन कुछ इलाकों में यूरेनियम की मात्रा बढ़ रही है. इसलिए नियमित जांच और स्थानीय स्तर पर सुधार आवश्यक हैं, ताकि पेयजल की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुल 83 नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 24 नमूनों में यूरेनियम का स्तर अधिक पाया गया. यह कुल एकत्र किए गए नमूनों का लगभग 13.35 से 15.66 प्रतिशत है.
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 47.12% सैंपल में देश भर में EC सबसे ज्यादा है, खारेपन के गंभीर हॉटस्पॉट हैं. फ्लोराइड भी 41.06% से ज्यादा है. नाइट्रेट कंटैमिनेशन और यूरेनियम ज्यादा पाया गया. 12% सैंपल में SAR 26 होने पर सिंचाई की चिंता और 24.42% RSC ज्यादा है.
ऐसे में यह भी जान लेते हैं कि EC, SAR और RSC होता क्या है
EC यानि इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी। इससें पानी की इलेक्ट्रिक करंट कंडक्ट करने की क्षमता को मापा जाता है, जो पानी में घुले हुए आयन पर निर्भर करता है. यह पानी में सलिनिटी या टोटल डिज़ॉल्व्ड सॉलिड कंटेंट को दिखाता है. हाई EC का मतलब आमतौर पर हाई सलिनिटी होता है, जिससे पानी सिंचाई और पीने के लिए बहुत उचित नहीं रह जाता.
SAR यानि सोडियम एड्सॉर्प्शन रेशियो जो एक कैलकुलेटेड वैल्यू है जो पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम के मुकाबले सोडियम का रिलेटिव प्रोपोर्शन दिखाता है. इसका इस्तेमाल सिंचाई के लिए पानी कितना सही है, यह पता लगाने के लिए किया जाता है, क्योंकि हाई SAR सोडियम जमा होने से मिट्टी की बनावट खराब कर सकता है.
अब बात अगर RSC रेसिडुअल सोडियम कार्बोनेट की करें तो यह पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम आयन के रिलेटिव कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट आयन के कंसंट्रेशन का अंतर है. हाई RSC वैल्यू संभावित सोडियमिटी खतरों को दिखाते हैं, जो सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल करने पर मिट्टी की हेल्थ पर असर डालते हैं. इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी से सलिनिटी का पता चलता है, जबकि SAR और RSC मिट्टी की केमिस्ट्री और स्ट्रक्चर पर सोडियम से जुड़े असर को मापते हैं.