CM भजनलाल शर्मा का फोकस रंग लाया, जनजातीय क्षेत्रों में 11.70 लाख से अधिक बच्चों का रिकॉर्ड नामांकन

Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 03 Aug, 2026 06:41 PM

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल से आदिवासी अंचलों में शिक्षा को बढ़ावा, 63 लाख घरों के सर्वे से 6,229 ड्रॉपआउट बच्चों की हुई पहचान, हजारों बच्चों की स्कूलों में वापसी।

जयपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रही है। सरकारी प्रयासों का सकारात्मक असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। वर्ष 2026-27 में जनजातीय क्षेत्रों के राजकीय विद्यालयों में 11 लाख 70 हजार 242 विद्यार्थियों का रिकॉर्ड नामांकन दर्ज किया गया है, जो पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में 14,780 अधिक है।

राज्य सरकार का दावा है कि शिक्षा से वंचित बच्चों को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

63 लाख घरों का पेपरलेस सर्वे, 6,229 ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान

शिक्षा विभाग ने स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान के लिए 63 लाख 26 हजार घरों का पेपरलेस सर्वे किया। इस सर्वे के दौरान 6,229 ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की गई, जिन्हें ब्रिज कोर्स के माध्यम से फिर से विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक विद्यार्थी को मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

शिक्षा पर बढ़ रहा निवेश, मजबूत हो रही नींव

जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार जनजाति विकास बजट का 13 प्रतिशत से अधिक (करीब 164 करोड़ रुपये) शिक्षा पर खर्च कर रही है।

इसके अलावा 10 नए आश्रम छात्रावास, 2 आवासीय विद्यालय और 1 खेल छात्रावास की स्थापना के लिए 64 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे दूरदराज के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित आवासीय सुविधाएं मिल सकें।

9,817 विद्यालयों में पढ़ रहे 11.81 लाख से अधिक विद्यार्थी

जनजातीय क्षेत्रों में वर्तमान में 9,817 सरकारी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें—

  • 5,866 प्राथमिक विद्यालय
  • 1,664 उच्च प्राथमिक विद्यालय
  • 2,146 उच्च माध्यमिक विद्यालय
  • 141 संस्कृत विद्यालय

शामिल हैं। इन विद्यालयों में 11 लाख 81 हजार 100 से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

PM श्री और मॉडल स्कूलों से बढ़ रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

आदिवासी क्षेत्रों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने विशेष विद्यालयों का विस्तार भी किया है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में—

  • 69 पीएम श्री विद्यालय
  • 17 स्वामी विवेकानंद मॉडल विद्यालय
  • 210 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय
  • 24 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय

संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों में विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ प्रतिस्पर्धी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

3,821 छात्रावासों और आवासीय संस्थानों का नेटवर्क

राज्य सरकार ने जनजातीय विद्यार्थियों के लिए आवासीय शिक्षा का मजबूत ढांचा तैयार किया है। प्रदेश में 1 लाख 48 हजार 808 प्रवेश क्षमता वाले 3,821 छात्रावास एवं आवासीय संस्थान संचालित किए जा रहे हैं।

इनमें आश्रम छात्रावास, खेल छात्रावास, कॉलेज छात्रावास, बहुउद्देशीय छात्रावास, आवासीय विद्यालय, मॉडल पब्लिक रेजिडेंशियल स्कूल, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल और मां-बाड़ी डे-केयर केंद्र शामिल हैं।

29 हजार से अधिक महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा में वापसी

कालीबाई भील महिला संबल शिक्षा सेतु योजना के तहत दिसंबर 2023 से जून 2026 तक 29 हजार से अधिक ड्रॉपआउट बालिकाओं और महिलाओं को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।

छात्रवृत्ति और स्कूटी योजना से मिल रहा प्रोत्साहन

अनुसूचित जनजाति उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 305 करोड़ रुपये खर्च कर 1 लाख 53 हजार 152 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया।

वहीं कालीबाई भील मेधावी स्कूटी योजना के माध्यम से प्रतिभाशाली छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराकर उच्च शिक्षा की राह को आसान बनाया जा रहा है।

राज्य सरकार का कहना है कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार केवल नामांकन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं और छात्र हितैषी योजनाओं के माध्यम से आदिवासी अंचलों को शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

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