Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 07 Aug, 2026 06:32 PM

भारत की कई पारंपरिक बुनाई आज भी सिर्फ कुछ इलाकों तक ही सीमित हैं। ऐसे में यदि इन्हें नया बाजार मिले, तो न सिर्फ यह कला जीवंत बनी रहती है, बल्कि इससे जुड़े कारीगरों की आमदनी भी बढ़ती है। इसी सोच के साथ रामराज कॉटन ने 'पंचा' नाम से अपनी नई हैंडलूम...
जयपुर | भारत की कई पारंपरिक बुनाई आज भी सिर्फ कुछ इलाकों तक ही सीमित हैं। ऐसे में यदि इन्हें नया बाजार मिले, तो न सिर्फ यह कला जीवंत बनी रहती है, बल्कि इससे जुड़े कारीगरों की आमदनी भी बढ़ती है। इसी सोच के साथ रामराज कॉटन ने 'पंचा' नाम से अपनी नई हैंडलूम धोती लॉन्च की है।
इस नई पेशकश में ओडिशा के मयूरभंज की संथाली बुनाई को धोती के रूप में लोगों तक पहुंचाया गया है। इसका उद्देश्य इस पारंपरिक कला को नई पहचान देना और उन आदिवासी महिला बुनकरों को ज्यादा काम दिलाना है, जो पीढ़ियों से इस बुनाई को संभाल रही हैं।
रामराज कॉटन के संस्थापक एवं चेयरमैन के. आर. नागराजन ने कहा, "भारत में कई पारंपरिक बुनाई ऐसी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। हमारी कोशिश है कि संथाली बुनाई ज्यादा लोगों तक पहुँचे, ताकि यह कला भी आगे बढ़े और इससे जुड़ी महिला बुनकरों को बेहतर आमदनी मिल सके।"
पंचा की हर धोती 100 प्रतिशत कॉटन से हाथ से बुनी गई है। इसमें पारंपरिक डिजाइन और बुनाई की वही खासियत रखी गई है, जिसके लिए संथाली बुनाई जानी जाती है। पहले इस बुनाई से मुख्य रूप से साड़ियाँ बनाई जाती थीं, लेकिन अब इसे धोती के रूप में भी पेश किया गया है, जिससे इसके लिए नए बाजार के रास्ते खुलेंगे। पंचा 7 अगस्त से चुनिंदा रामराज कॉटन एक्सक्लूसिव स्टोर्स और कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।