Edited By Anil Jangid, Updated: 08 Aug, 2026 01:43 PM

जयपुर। राजस्थान में अब एक और आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है, जिसके तहत अब ट्रैक्टर ट्रॉली संचालक सड़कों पर उतरते दिखाई पड़ रहे हैं। दरअसल अब खनिज सामग्री परिवहन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली को पहले 6 टन तक का रवन्ना मिलती थी, लेकिन अब केवल 2.6 टन का रवन्ना...
जयपुर। राजस्थान में अब एक और आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है, जिसके तहत अब ट्रैक्टर ट्रॉली संचालक सड़कों पर उतरते दिखाई पड़ रहे हैं। दरअसल अब खनिज सामग्री परिवहन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली को पहले 6 टन तक का रवन्ना मिलती थी, लेकिन अब केवल 2.6 टन का रवन्ना जारी किए जाने के विरोध किया जा रहा है। जिसके चलते प्रदेशभर के एक लाख से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालक आंदोलन के मूड में है।
संचालकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो सभी जिलों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ जयपुर कूच किया जाएगा। आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए 10 अगस्त को सीकर में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई गई है। संचालकों का कहना है कि सरकार ने ट्रॉली का पंजीकरण, फास्टैग और जीपीएस अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन परिवहन क्षमता घटाकर 2.6 टन कर दी गई। इससे उनकी आय प्रभावित हुई है।
इसके साथ ही निर्धारित सीमा से अधिक खनिज सामग्री मिलने पर प्रति टन एक हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया जा रहा है। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली समिति के अध्यक्ष सागरमल बाजिया ने बताया कि पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए 6 टन तक खनिज सामग्री परिवहन का रवन्ना जारी होता था। नई व्यवस्था में ट्रॉली का पंजीकरण, फास्टैग व जीपीएस लगाने के बाद भी केवल 2.6 टन का ही रवन्ना मिल रहा है।