'नारी वंदन' के शोर के बीच ब्यूरोक्रेसी में महिला शक्ति कम, राजस्थान से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

Edited By Swati Sharma, Updated: 07 May, 2026 11:47 AM

jaipur amidst clamour for women worship women power in bureaucracy is low

Jaipur News :  देश में 'नारी वंदन अधिनियम' के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की चर्चा जोरों पर है। लेकिन राजनीति से इतर, शासन-प्रशासन को चलाने वाली ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) में महिलाओं की कमी एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।...

Jaipur News :  देश में 'नारी वंदन अधिनियम' के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की चर्चा जोरों पर है। लेकिन राजनीति से इतर, शासन-प्रशासन को चलाने वाली ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) में महिलाओं की कमी एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। राजस्थान सहित देशभर की प्रशासनिक सेवाओं में महिला अधिकारियों की संख्या आज भी उम्मीद से काफी कम है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां अखिल भारतीय सेवाओं में महिला आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, वहीं राजस्थान प्रशासनिक सेवा में आरक्षण होने के बावजूद महिलाओं की संख्या कुल कैडर की एक तिहाई तक नहीं पहुंच पाई है।

राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था की वर्तमान स्थिति यह है कि आईएएस (IAS) से लेकर आरएएस (RAS) तक, कहीं भी महिलाओं का एक तिहाई प्रतिनिधित्व नहीं है। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) में महिला अधिकारियों की मौजूदगी बेहद चिंताजनक स्तर पर कम है। एक तरफ जहां पिछले 10 वर्षों से राजस्थान में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों का नामांकन लड़कों की तुलना में लगातार अधिक बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक परीक्षाओं के अंतिम परिणाम में उनकी यह सफलता उस अनुपात में नजर नहीं आती।

सामाजिक कार्यकर्ताओं के विचार

इस मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों से उठी आवाजें व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रही हैंः-

"महिलाएं प्रशासनिक मुद्दों को अधिक संवेदनशीलता के साथ संभालती हैं। मैं सीधे आरक्षण की बात नहीं करती, लेकिन महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से परीक्षा या विशेष मेरिट का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि काबिलियत को मौका मिले।"

- रेहाना रियाज चिश्ती, पूर्व अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग

"हमें इस पर शोध (Research) करने की जरूरत है कि लड़कियां परीक्षाओं में बैठने के बावजूद साक्षात्कार या लिखित परीक्षा में कहां पिछड़ रही हैं। परिवार और समाज को मिलकर महिलाओं के लिए बेहतर अवसर पैदा करने होंगे।"

-अरुणा रॉय, पूर्व IAS एवं सामाजिक कार्यकर्ता

क्या होगा प्रशासन में महिलाओं के बढ़ने का असर?

पूर्व मंत्री अनीता भदेल का मानना है कि यदि प्रशासन में महिलाएं निर्णायक भूमिका में होंगी, तो जनसुनवाई का तंत्र अधिक मजबूत और संवेदनशील होगा। विशेषकर महिलाओं से संबंधित अपराधों और शिकायतों पर त्वरित और सटीक कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी।

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