सरकारी स्कूल की छात्रा वाणी जैन: शतरंज की बिसात पर सेवा, संस्कार और सफलता की नई कहानी

Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Jun, 2026 05:02 PM

govt school student vani jain inspires young minds through chess

जयपुर। आज के दौर में जहां अधिकांश युवा अपनी उपलब्धियों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित रखते हैं, वहीं जयपुर की एक नन्हीं बेटी अपने सपनों को समाज के सपनों से जोड़कर एक नई मिसाल कायम कर रही है।

जयपुर। आज के दौर में जहां अधिकांश युवा अपनी उपलब्धियों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित रखते हैं, वहीं जयपुर की एक नन्हीं बेटी अपने सपनों को समाज के सपनों से जोड़कर एक नई मिसाल कायम कर रही है। यह कहानी है युवा शतरंज खिलाड़ी वाणी जैन की, जिन्होंने कम उम्र में ही यह साबित कर दिया है कि असली सफलता केवल स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ाने में होती है।

प्रतिभा, मेहनत और सेवा भावना के बल पर बनाई पहचान 
एक साधारण महात्मा गांधी सरकारी विद्यालय में अध्ययनरत वाणी जैन ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और सेवा भावना के बल पर ऐसी पहचान बनाई है, जो उनकी उम्र से कहीं बड़ी दिखाई देती है। शतरंज उनके लिए केवल एक खेल नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन चुका है।

85 बच्चों को निःशुल्क शतरंज प्रशिक्षण दिया
जब अधिकांश बच्चे अपने जन्मदिन पर केक, पार्टी और उपहारों का इंतजार करते हैं, तब वाणी ने अपने 15वें जन्मोत्सव को समाज के नाम समर्पित कर दिया। उन्होंने 15 दिनों तक लगातार 85 बच्चों को निःशुल्क शतरंज प्रशिक्षण दिया। उनका उद्देश्य केवल बच्चों को शतरंज सिखाना नहीं था, बल्कि उन्हें धैर्य, अनुशासन, एकाग्रता, आत्मविश्वास और सही निर्णय लेने की कला सिखाना भी था।

निःशुल्क शतरंज बोर्ड उपहार स्वरूप भेंट किए
लेकिन वाणी का योगदान यहीं नहीं रुका। उन्होंने यह महसूस किया कि यदि प्रशिक्षण के बाद बच्चों के पास अभ्यास करने के साधन नहीं होंगे, तो उनकी सीख अधूरी रह जाएगी। इसलिए उन्होंने सभी बच्चों को निःशुल्क शतरंज बोर्ड उपहार स्वरूप भेंट किए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक कारणों से अपने सपनों से दूर न हो जाए। साथ ही प्रत्येक प्रतिभागी को प्रमाण-पत्र एवं सम्मान पत्र प्रदान किए गए, जिससे उन्हें अपने प्रयासों पर गर्व हो और भविष्य में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।

बच्चों को सम्मानित करवाकर आत्मविश्वास बढ़ाया 
वाणी ने इन बच्चों को केवल शतरंज नहीं सिखाया, बल्कि उन्हें मंच भी दिलाया। विभिन्न सामाजिक और खेल आयोजनों में बच्चों को सम्मानित करवाकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया गया। आज उन्हीं बच्चों में से कई बच्चे नियमित अभ्यास कर रहे हैं और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं।

निस्वार्थ सेवा और समर्पण ने समाज का ध्यान आकर्षित किया
वाणी की निस्वार्थ सेवा और बच्चों के प्रति समर्पण ने समाज का ध्यान आकर्षित किया। उनके कार्यों से प्रभावित होकर जयपुर के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान जय श्री ज्वेलर्स ने अपने शोरूम के द्वार बच्चों के प्रशिक्षण के लिए खोल दिए। यह केवल सहयोग नहीं था, बल्कि एक बेटी के सपनों और उसके मिशन पर समाज द्वारा जताया गया विश्वास था।

शतरंज जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां अभियान से जुड़ी
वाणी के प्रयासों से प्रेरित होकर शतरंज जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी इस अभियान से जुड़ रही हैं। इंटरनेशनल आर्बिटर भगवती प्रसाद शर्मा, सीनियर शतरंज कोच विक्रम सिंह, एडवोकेट पियूष शर्मा, दीपक राव सहित अनेक अनुभवी मार्गदर्शक बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी निःशुल्क सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। यह दृश्य अपने आप में अद्भुत है कि एक किशोरी की सोच ने इतने अनुभवी लोगों को समाज के लिए एक मंच पर ला खड़ा किया।

बच्चे बौद्धिक विकास की दिशा में बढ़ा रहे कदम
आज वाणी जैन का यह प्रयास केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि जयपुर में शतरंज जागरूकता और प्रतिभा विकास का एक प्रेरणादायक अभियान बन चुका है। उनके कारण अनेक बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया से निकलकर बौद्धिक विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। वाणी जैन केवल एक खिलाड़ी नहीं हैं। वे उन बच्चों के लिए उम्मीद हैं, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। वे उन अभिभावकों के लिए विश्वास हैं, जो अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना चाहते हैं। और वे उस समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो आज भी मानता है कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े पद या बड़ी उम्र से नहीं, बल्कि एक सच्चे संकल्प से होती है।

वाणी जैन की यात्रा का सबसे सुंदर संदेश
वाणी जैन की यह यात्रा बताती है कि सफलता खेल जीतने में ही नहीं , बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में भी होती है। शायद यही कारण है कि आज वाणी जैन का नाम केवल शतरंज की बिसात तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सेवा, संस्कार, नेतृत्व और सामाजिक प्रेरणा का पर्याय बनता जा रहा है। हाल ही में वाणी जैन को वूमेन पावर सोशिलीटी फाउंडेशन के राष्ट्रीय खेलकूद विभाग कि ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है।

उम्र छोटी होने के बावजूद सपने बड़े देखे जा सकते हैं
एक सरकारी स्कूल की छात्रा ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे नेक हों, तो उम्र छोटी होने के बावजूद सपने बड़े देखे जा सकते हैं और उन्हें पूरा भी किया जा सकता है। आज वाणी बच्चों को शतरंज सिखा रही हैं, लेकिन वास्तव में वह उन्हें जीवन की सबसे बड़ी सीख दे रही हैं खुद आगे बढ़ो और दूसरों को भी साथ लेकर आगे बढ़ाओ। यही सोच उन्हें एक खिलाड़ी से आगे बढ़ाकर एक प्रेरणा, एक पहचान और आने वाले समय की युवा आइकॉन बनाती है।

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